चार वर्ष पहले रोजगार के सिलसिले में मस्कट गए लोअर पट्टी गांव के गुरप्रीत सिंह के घर चार वर्षां बाद एक बेहद चिंतजनक खबर पंहुची जिससे गुरप्रीत की बजूर्ग माता सतवंत कौर सहित अन्य रिस्तेदारों में भी मातम का महौल पैदा कर दिया और यह मनहूस खबर थी कि गुरप्रीत सिंह को वहां की अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है और २५ तारीख को यह मनहूस खबर मिलने के उपरांत माता व अन्य रिस्तेदारों की मानों नींद ही उड़ गई हो। गुरप्रीत के कजन भाई भुपेंद्र सिंह व माता सतवंत कौर ने कहा कि गुरप्रीत की पिता की मौत हो चुकी है और घर में अकेली उनकी बजूर्ग माता ही है और गुरप्रीत घर का इकलौता चिराग है जो अपने बेहतर भविष्य के लिए चार साल पहले मस्कट नौकरी के लिए गया था और वह मास्कट से साऊदी अरब के लिए ट्रक लेकर जाता था और लगभग दो वर्ष पहले उसा नशा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार जेल में बंद कर दिया गया लेकिन परिवार को इसकी भनक तक नही लगी।फांसी की सजा होने के उपरांत वहा की सरकार ने भारत सरकार को इसकी जानकारी दी और भारत सरकार की और से परिवार तक जानकारी पंहुचाने की जिम्मेदारी डीसी रूपनगर और डीसी रूपनगर ने एसडीएम नंगल को और एसडीएम नंगल ने यह जानकारी परिवार तक पंहुचाने की जिम्मेदारी तहसीलदार को दी और २७ सितंबर को जब यह जानकारी तहसीलदार नंगल सुमित ढिल्लोंं ने परिवार को दी तो परिवार के पैरों तले से मानो जमीन ही खिस्क गई हो।