पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के रिश्तों को लेकर एक बार फिर नए संकेत दिखाई दे रहे हैं। करीब छह साल पहले कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल पिछले चार वर्षों में तीन अलग-अलग मौकों पर भाजपा के साथ खड़े होने के संकेत दे चुका है। इसके बावजूद भाजपा की ओर से अब तक ऐसा कोई समान राजनीतिक कदम सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है। भाजपा लगातार पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने और अपने दम पर सरकार बनाने की तैयारी का संदेश दे रही है। अकाली दल के तीन सकारात्मक संकेतों के बावजूद भाजपा का सार्वजनिक रुख नहीं बदला है। भाजपा सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी का संदेश दे रही है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष ने अगस्त में पंजाब दौरे के दौरान सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ने और अपने दम पर सरकार बनाने की तैयारी का संकेत दिया था। 31 अगस्त को भाजपा के पंजाब संगठन प्रभारी सतीश पूनिया ने भी इसी रुख को दोहराया। हालांकि राजनीतिक गलियारों में दोनों दलों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत की चर्चाएं हैं। इसलिए गठबंधन की सभी संभावनाएं खत्म होने की बात कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल तस्वीर यही है कि अकाली दल संबंध सुधारने की दिशा में लगातार संकेत दे रहा है, जबकि भाजपा संगठन विस्तार और 117 सीटें, अकेले चुनाव की रणनीति पर कायम है।