अमर उजाला की ओर से विचार मंथन निर्मल गंगा प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश कार्यक्रम में वक्ता ध्रुव सेन सिंह ने प्रकृति, पर्यावरण और प्राकृतिक आपदाओं पर बोलते हुए कहा कि प्रकृति पर्यावरण का वह भाग है जो मानव नियंत्रण से पूरी तरह परे है। कितना भी विकसित देश क्यों न हो, वह भूकंप, चक्रवात और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोक नहीं सकता। हालांकि, प्राकृतिक नियमों और वैज्ञानिक तथ्यों को ध्यान में रखकर आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम अवश्य किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति हमें जल, वायु और स्थल मंडल (एटमॉस्फियर, हाइड्रोस्फियर, लिथोस्फियर) के रूप में जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं प्रदान करती है, जो मानव अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक संतुलन बनाती हैं।