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VIDEO: जलभराव में घर छूटा तो नाले किनारे बनाया ठिकाना, नगर निगम ने झोपड़ी तोड़ी, बिना सूचना कार्रवाई का आरोप

लखनऊ। फैजुल्लागंज में जलभराव की आपदा झेल रहे लोगों पर नगर निगम की अतिक्रमण कार्रवाई भारी पड़ रही है। प्रभावित लोगों ने नगर निगम पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर परेशान करने और भेदभाव का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नाले पर झोपड़ी और गुमटी लगाने वालों को तोड़कर हटा दिया गया, जबकि नाले में निर्माण सामग्री डालकर रखने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दाउदनगर निवासी ई-रिक्शा चालक सकटू अपनी पत्नी मनोरमा और दो बेटियों के साथ रहते हैं। कॉलोनी में जलभराव के बाद घर में रहना मुश्किल हुआ तो परिवार ने 60 फीट बंधे के किनारे नाले पर अस्थायी झोपड़ी बनाकर ठिकाना बना लिया था। रविवार को नगर निगम जोन-3 की टीम पहुंची और बिना किसी पूर्व सूचना के झोपड़ी तोड़कर सामान किनारे फेंक दिया। परिवार का कहना है कि पहले सूचना दी जाती तो वे खुद अपना सामान हटा लेते। इसी तरह दुर्गापुरी निवासी अमित की लोहे की गुमटी को भी नगर निगम कर्मियों ने धक्का देकर नाले के दूसरी ओर गिरा दिया। मामा कॉलोनी निवासी रिंकी को भी झोपड़ी हटाने के लिए कहा गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि वे पहले ही जलभराव के कारण घर छोड़कर अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं। ऐसे में बिना सूचना सामान हटाने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। लोगों ने आरोप लगाया कि नाले में कई जगह अन्य लोगों ने निर्माण सामग्री जमा कर रखी है, लेकिन उसे हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि अतिक्रमण हटाने में सभी के खिलाफ समान कार्रवाई होनी चाहिए। जलभराव के बीच जिन लोगों ने मजबूरी में नाले या बंधे के किनारे अस्थायी ठिकाने बनाए हैं, उन्हें पहले सूचना देकर सामान हटाने का मौका दिया जाना चाहिए था।

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