अमर उजाला ब्यूरो झांसी। दुनिया में टीबी (क्षय रोग) के हर चार मरीजों में से एक भारत का है। इस बीमारी से होने वाली मौतों में भी भारत की बड़ी हिस्सेदारी है। देश में हर साल करीब 27 लाख नए टीबी मरीज मिल रहे हैं, जबकि 3.12 लाख लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष करीब सात लाख नए मरीज सामने आते हैं और 55 हजार लोगों की जान जाती है। यह जानकारी शनिवार को खास बातचीत में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के नेशनल वाइस चेयरमैन डॉ. सूर्यकांत ने दी। उन्होंने कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद टीबी मरीजों की बड़ी संख्या चिंता का विषय है। इस बीमारी से मुक्ति जनभागीदारी और प्रधानमंत्री से लेकर आम नागरिक तक के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। जिस तरह पूरे देश के एकजुट प्रयासों से पोलियो पर नियंत्रण पाया गया, उसी तरह टीबी उन्मूलन के लिए भी सभी को सहयोग करना होगा। डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि भारत में टीबी मरीजों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर सामने आने वाले हर चार मरीजों में से एक भारत का होता है। उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन की रणनीति में वर्ष 2018 में व्यापक बदलाव किए गए। इसके तहत मरीजों की जांच और दवाएं निशुल्क उपलब्ध कराने के साथ ही पौष्टिक आहार के लिए आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था की गई। इसका सकारात्मक असर देखने को मिला है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी इन प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों के ठीक होने की दर दोगुनी हुई है, जबकि मृत्यु दर में भी दोगुनी कमी आई है। हालांकि, बीमारी को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभी और प्रयास करने की जरूरत है। फेफड़े में धब्बा दिखने पर तुरंत शुरू न करें इलाज डॉ. सूर्यकांत ने चिकित्सकों को संदेश देते हुए कहा कि फेफड़े में दिखने वाला हर धब्बा टीबी का संकेत नहीं होता। यह किसी अन्य गंभीर बीमारी या वायरस-बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण भी हो सकता है। इसलिए एक्सरे में धब्बा दिखने पर बिना पुष्टि के टीबी का उपचार शुरू नहीं करना चाहिए। बलगम की जांच और आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि होने के बाद ही इलाज शुरू किया जाना चाहिए। संदिग्ध मरीजों की जांच की सुविधा प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी बनी रहे, बुखार आए या वजन कम होने लगे तो उसे टीबी की जांच जरूर करानी चाहिए। समय पर पहचान और नियमित उपचार से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।