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भारतीय रिजर्व बैंक बढ़ा सकता है ब्याज दर, महंगे हो सकते हैं सभी बैंक लोन!

Tue, 06 Oct 2026 04:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अहम बैठक 5 अक्टूबर से शुरू हो रही है। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक में देश की मौद्रिक नीति, महंगाई और आर्थिक हालात को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बैठक में लिए जाने वाले फैसलों का ऐलान 7 अक्टूबर को किया जाएगा। इस बार सबसे ज्यादा नजर नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट पर है। बाजार में इस बात की चर्चा तेज है कि RBI महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगी। हालांकि, अंतिम फैसला MPC के सदस्यों की चर्चा और उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिया जाएगा।

रेपो रेट को लेकर इस बार सबसे बड़ी चिंता महंगाई के मोर्चे पर बढ़ते दबाव की है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। भारत अपनी जरूरत के एक बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा कमजोर मानसून के कारण देश के कुछ हिस्सों में फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। इससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई को लेकर RBI की चिंता बढ़ सकती है।

अगस्त में हुई पिछली MPC बैठक के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में भी काफी बदलाव देखने को मिला है। उस समय कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 91 डॉलर प्रति बैरल थी। इसके बाद सितंबर की शुरुआत में कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के बीच 9 सितंबर को कीमत करीब 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। सितंबर के अंत में ब्रेंट क्रूड करीब 103 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ, जो RBI के 85 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से काफी ऊपर था।

अगर RBI रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है, तो इसका असर बैंकिंग सिस्टम की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। बैंक होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं, जिससे नई EMI महंगी हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक अपनी लेंडिंग दरों में कितना बदलाव करते हैं। दूसरी ओर, ऊंची ब्याज दरें महंगाई को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं, क्योंकि इससे कर्ज की मांग और खर्च पर कुछ दबाव आता है।

ऐसे में 7 अक्टूबर को होने वाला RBI का ऐलान आम लोगों, कारोबारियों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा। बाजार की नजर सिर्फ रेपो रेट पर ही नहीं, बल्कि RBI के महंगाई, कच्चे तेल, मानसून और आर्थिक विकास को लेकर दिए जाने वाले संकेतों पर भी रहेगी। अंतिम निर्णय MPC की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।


 

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