एक चेहरा, दो महिलाएं और दिल्ली पुलिस के सामने पहचान का ऐसा कन्फ्यूजन, जिसने पूरे घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जब AISA की नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा सड़कों पर प्रदर्शन कर रही थीं, उसी दौरान पुलिस ने एक दूसरी महिला को नेहा बोरा समझकर पकड़ लिया। पुलिस को लगा कि उसने प्रदर्शन कर रही छात्र नेता को हिरासत में ले लिया है, लेकिन कुछ ही देर में तस्वीर साफ हो गई। खबरों की माने तो जिसे पुलिस ने पकड़ा, वह असली नेहा बोरा नहीं, बल्कि उनकी हमशक्ल निकली। दिलचस्प बात ये है कि एक तरफ पुलिस आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर महिला को पकड़ रही थी, तो दूसरी तरफ असली नेहा बोरा कनॉट प्लेस में प्रदर्शन कर रही थीं। अब सवाल है कि आखिर दो नेहाओं के इस घटनाक्रम की शुरुआत कैसे हुई और पुलिस पहचान के इस भ्रम में कैसे उलझ गई?