गुजरात के निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद अब सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी नतीजों को लेकर सीधे राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है। शाह ने सवाल उठाया कि गुजरात में लगातार चुनावी हार का ठीकरा क्या कांग्रेस अब एसआईआर पर भी फोड़ेगी? उन्होंने गुजरात से लेकर राजस्थान और त्रिपुरा तक के चुनावी नतीजों का हवाला देते हुए कांग्रेस को आत्ममंथन करने की नसीहत दी। साथ ही दावा किया कि जनता ने बार-बार बीजेपी और एनडीए पर भरोसा जताया है। शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी बीजेपी की जीत का भरोसा जताया। यानी निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब सियासी लड़ाई चुनावी आंकड़ों से आगे बढ़कर एसआईआर, घुसपैठ और विपक्ष की रणनीति तक पहुंच गई है।
गुजरात के नतीजों को लेकर अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 1985 के बाद से गुजरात में जीत हासिल नहीं कर पाई है और 41 साल बाद भी उसकी स्थिति नहीं बदली। शाह ने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या इस हार का जिम्मेदार भी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को ठहराया जाएगा?
गांधीनगर नगर निगम में बीजेपी ने 44 में से 38 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को पांच और निर्दलीय को एक सीट मिली। आम आदमी पार्टी यहां खाता नहीं खोल सकी। शाह ने दावा किया कि गांधीनगर में बीजेपी के वोट प्रतिशत में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि आप ने 32 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी पर उसकी जमानत जब्त हो गई। शाह के मुताबिक, इन नतीजों को विपक्ष को अपनी चुनावी रणनीति पर विचार करने के संकेत के तौर पर देखना चाहिए।
अमित शाह ने अपने हमले को गुजरात तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुदुचेरी के उपचुनावों का जिक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस को इन चुनावों में एक भी सीट नहीं मिली। उन्होंने असम के नौगांव में बीजेपी की जीत, पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में बीजेपी उम्मीदवार की सफलता और रेजीनगर में तृणमूल कांग्रेस से सीट जीतने का भी हवाला दिया।
पुदुचेरी में एनडीए के सहयोगी एआईएनआरसी के उम्मीदवार की जीत का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि चुनावी नतीजे कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का संदेश हैं। हालांकि, ये आंकड़े और उदाहरण शाह ने अपने राजनीतिक तर्क के समर्थन में पेश किए।
शाह ने राजस्थान और त्रिपुरा के चुनावी नतीजों को भी कांग्रेस पर हमले का आधार बनाया। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में बीजेपी ने नगर निगम की 90 फीसदी, नगर परिषद की 66 फीसदी और नगर पालिकाओं की 65 फीसदी सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, त्रिपुरा के ग्राम समिति चुनावों का हवाला देते हुए शाह ने कहा कि करीब 4,600 सीटों में से एनडीए को 4,000 सीटों पर जीत मिली।
शाह ने खास तौर पर त्रिपुरा में बैलेट बॉक्स से हुए चुनाव का जिक्र किया और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी लगातार चुनावी हार के कारणों पर विचार करना चाहिए।
अमित शाह ने राहुल गांधी के नेतृत्व और विपक्षी एकजुटता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने या बड़ी भीड़ जुटाने से देश की आवाज नहीं बना जा सकता। शाह ने कांग्रेस पर एसआईआर के बहाने घुसपैठियों को बचाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।
अपने बयान के अंत में शाह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी और एनडीए 2029 के लोकसभा चुनाव में फिर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटेंगे। हालांकि, यह शाह का राजनीतिक दावा है, चुनावी परिणाम नहीं।
गुजरात के निकाय चुनावों ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बहस को फिर तेज कर दिया है। एक तरफ अमित शाह चुनावी नतीजों को कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का संदेश बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्तियां राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। अब सवाल यही है कि क्या कांग्रेस इन नतीजों के बाद अपनी रणनीति में बदलाव करेगी?