दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के आंदोलन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के मामले में पार्टी के दो प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। वहीं, इस घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके दिल्ली पहुंच गए। एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या अब देश में तिरंगा फहराना भी अपराध हो गया है? हालांकि, एयरपोर्ट पर उन्हें विरोध का सामना भी करना पड़ा। एक व्यक्ति ने उनसे सवाल किया कि आखिर वह देश को क्यों खराब कर रहे हैं।
दिल्ली एयरपोर्ट पर अभिजीत दीपके ने अपने साथियों की गिरफ्तारी को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन के लिए जेल भेज दिया गया, क्योंकि वे जंतर-मंतर पहुंचे और वहां तिरंगा फहराया।
दीपके ने इसकी तुलना ब्रिटिश शासन के दौर से करते हुए कहा कि उस समय सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा फहराने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार किया जाता था। उनका सवाल था कि क्या आज भी तिरंगा फहराने के लिए लोगों को जेल भेजा जा सकता है?
हालांकि, दीपके के बयान के बीच एयरपोर्ट पर मौजूद एक व्यक्ति ने उनसे असहमति जताते हुए पूछा, “क्यों देश को खराब कर रहा है भाई?” दीपके ने इस टिप्पणी पर कोई लंबी प्रतिक्रिया देने के बजाय मुस्कुराते हुए विरोध करने वाले व्यक्ति को अंगूठे का इशारा दिखाया।
पुलिस के मुताबिक, मंगलवार सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे समेत CJP के करीब 14 सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने निजी परिसर से प्रवेश किया, तिरंगा फहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए।
पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर को हाल ही में प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया था। ऐसे में वहां किया गया प्रदर्शन अनधिकृत था। इसी आधार पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
बुधवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन, अतिक्रमण और अन्य आरोपों के सिलसिले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, दोनों नेताओं को पहले भी हिरासत में लिया गया था और एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने के बाद रिहा किया गया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया।
इसी मामले में CJP नेता अजिंक्य शिंदे को पांच हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया। इस तरह एक ही प्रदर्शन से जुड़े तीन प्रमुख चेहरों में से दो को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि तीसरे को शर्तों के साथ रिहाई मिली।
अभिजीत दीपके 10 अक्टूबर को हुए CJP प्रदर्शन के बाद महाराष्ट्र स्थित अपने पैतृक गांव चले गए थे। उस दौरान उनकी दादी का निधन हो गया था। इससे पहले, 50 हजार रुपये का श्योरिटी बॉन्ड भरने और एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर उन्हें जमानत मिली थी।
अब सौरव दास और आशुतोष रांका के जेल जाने के बाद दीपके बुधवार को दिल्ली लौट आए हैं। उनके लौटने के बाद CJP आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक बहस फिर तेज हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और विरोध के अधिकार का सवाल है। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध कर रही है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि निर्धारित नियमों और बॉन्ड की शर्तों का पालन करना जरूरी है।
अब सवाल है कि CJP अपने आंदोलन को आगे किस दिशा में ले जाएगी और नेताओं की हिरासत को लेकर अगला कदम क्या होगा? फिलहाल, दिल्ली में दीपके की वापसी और दो नेताओं को तिहाड़ भेजे जाने से यह विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है।