हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से फीस में की गई बढ़ोतरी के विरोध में मंगलवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की राजकीय महाविद्यालय सोलन इकाई ने प्रदर्शन किया। कॉलेज परिसर में एसएफआई कार्यकर्ताओं ने धरना देकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और फीस वृद्धि के विरोध में एचपीयू कुलपति का पुतला जलाया। एसएफआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से छात्रों पर 25 प्रतिशत फीस वृद्धि का फैसला अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला है। उनका कहना है कि शिक्षा को महंगा करने वाले ऐसे फैसलों का सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ता है। एसएफआई ने कहा कि शिक्षा किसी व्यवसाय का माध्यम नहीं बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है। लगातार बढ़ रही फीस के कारण छात्रों और उनके परिवारों की आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं। विशेष रूप से मजदूर, किसान, गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा की लागत बढ़ना बड़ी चुनौती है। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से फीस वृद्धि को पूरी तरह वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा सभी विद्यार्थियों के लिए सुलभ होनी चाहिए और आर्थिक स्थिति किसी छात्र की पढ़ाई में बाधा नहीं बननी चाहिए। एसएफआई के अनुसार, संगठन के लगातार आंदोलन और छात्रों के दबाव के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन ने फीस वृद्धि में 15 प्रतिशत की कमी करने का निर्णय लिया है। संगठन ने इसे छात्रों के संघर्ष की आंशिक जीत बताया। हालांकि, एसएफआई का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से की गई पूरी फीस वृद्धि अभी वापस नहीं ली गई है। संगठन ने मांग की कि छात्रों पर डाली गई अतिरिक्त फीस का बोझ पूरी तरह समाप्त किया जाए। एसएफआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक छात्रों के हित में फीस वृद्धि को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक संगठन इस मुद्दे को उठाता रहेगा।