डाइट नाहन में समग्र शिक्षा विभाग की ओर से पीएमश्री स्कूलों के शिक्षकों के लिए उद्यमिता मानसिकता विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला गुरुवार को शुरू हुई। उपप्रधानाचार्य डॉ. ईश्वर राही ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। जिला समन्वयक डॉ. शैली गोपाल भी इस दौरान मौजूद रहीं। कार्यशाला में जिले के 12 पीएमश्री स्कूलों के 24 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाना है। पहले दिन 11 स्कूलों के 22 शिक्षकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसी शिक्षण विधियों से परिचित कराना है, जिनसे विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार, नेतृत्व क्षमता और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित किए जा सकें। कार्यशाला के पहले दिन शिक्षकों को 20 मिनट में एक वस्तु के 100 अलग-अलग उपयोग बताने का टास्क दिया गया। इसके लिए मेज, कुर्सी, कैंची सहित अन्य वस्तुओं को चुना गया। शिक्षक निर्धारित समय में सभी उपयोग नहीं बता सके, लेकिन इस गतिविधि का उद्देश्य उनकी रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना था। मुख्य वक्ता ने समझाया कि कुर्सी का इस्तेमाल केवल बैठने के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य तरीकों से भी किया जा सकता है। इसी तरह प्रत्येक वस्तु के उपयोग के नए तरीके तलाशने के लिए लीक से हटकर सोचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नवाचार की शुरुआत किसी चीज को अलग नजरिये से देखने और उसके अधिकतम उपयोग की संभावनाएं तलाशने से होती है। उपप्रधानाचार्य डॉ. ईश्वर राही ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी पढ़ाई तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उनमें ऐसी सोच विकसित करना है, जिससे वे भविष्य में रोजगार पाने के साथ रोजगार देने वाले भी बन सकें। इसके लिए छोटी कक्षाओं से ही विद्यार्थियों में उद्यमिता की समझ विकसित करना जरूरी है। कार्यशाला में गतिविधि आधारित शिक्षण, समस्या समाधान, समुदाय से जुड़े मुद्दों की पहचान, व्यावसायिक विचारों के विकास और उद्यमिता के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला समन्वयक डॉ. शैली गोपाल ने कहा कि समग्र शिक्षा का यह प्रयास विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशलों से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला पूरी होने के बाद प्रशिक्षित शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में उद्यमिता माइंडसेट की कक्षाएं शुरू कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।