नाहन में दशहरा उत्सव की तैयारियों के बीच रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले बना रहे कारीगरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस बार कारीगरों को नगर परिषद की ओर से भवन में जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई है, जिसके चलते उन्हें खुले मैदान में ही पुतले तैयार करने पड़ रहे हैं। बारिश के कारण पुतलों में इस्तेमाल होने वाला कागज गल रहा है, वहीं कारीगरों को रात भी खुले पैवेलियन में बिताने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। खुले मैदान में पुतले बनाने के दौरान बारिश उनके काम में बाधा बन रही है। कागज भीगकर खराब होने से पुतलों को नुकसान पहुंच रहा है और कारीगरों को दोबारा मेहनत करनी पड़ रही है। इसके अलावा दिन के समय मैदान में बच्चे क्रिकेट और फुटबॉल खेलते हैं। ऐसे में खेल के दौरान गेंद लगने से भी तैयार हो रहे पुतलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। उत्तर प्रदेश से नाहन आए कारीगर गुलफाम ने बताया कि बारिश के कारण इस बार पुतले बनाने में इस्तेमाल होने वाला पूरा कागज गल गया। इसके चलते उन्हें दोबारा मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि खुले स्थान पर काम करने और रात बिताने के कारण भी कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। कारीगर गुलफाम ने नगर परिषद से मांग की कि उन्हें पहले की तरह पुतले तैयार करने के लिए किसी सुरक्षित स्थान पर जगह उपलब्ध करवाई जाए। इससे वे बारिश और अन्य बाधाओं से बचकर समय पर काम पूरा कर सकेंगे। कारीगरों का कहना है कि सुरक्षित जगह मिलने से वे दशहरा उत्सव से एक दिन पहले पुतलों को चौगान में लाकर स्थापित करने की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। उन्होंने नगर परिषद से भविष्य में भी पुतले बनाने के लिए पहले की तरह उपयुक्त स्थान उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करने की मांग की है।