बरसात के बाद मंडी-पधर हाईवे के ग्रीन फील्ड एरिया में सामने आए नए जलस्त्रोत अब हाईवे की सुरक्षा में बाधा नहीं बनेंगे। इन जलस्त्रोतों से निकलने वाले पानी की निकासी को व्यवस्थित करने के लिए एनएचएआई ने चैनलाइजेशन का काम शुरू करवा दिया है। पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट के तहत मंडी से पधर तक करीब 19 किलोमीटर हिस्से का निर्माण किया गया है। इसमें लगभग 8 किलोमीटर क्षेत्र ग्रीन फील्ड एरिया में आता है। बरसात के दौरान इस क्षेत्र में जमीन से कई जगह पानी के नए स्त्रोत सामने आए। करीब 5 से 6 स्थानों पर उभरे इन जलस्त्रोतों के कारण हाईवे के किनारे पानी की निकासी को लेकर स्थिति पर ध्यान देना जरूरी हो गया था। एनएचएआई ने अब इन जलस्त्रोतों के पानी को हाईवे से सुरक्षित दूरी पर निकालने के लिए चैनलाइजेशन का काम शुरू करवा दिया है। इसका उद्देश्य पानी को मनमाने तरीके से हाईवे की ओर बहने से रोकना और उसे निर्धारित निकासी व्यवस्था तक पहुंचाना है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी ने बताया कि बरसात के कारण ग्रीन फील्ड एरिया में कुछ नए जलस्त्रोत सामने आए हैं। इनसे निकलने वाले पानी को हाईवे से सुरक्षित दूरी पर ले जाने के लिए चैनलाइज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जलस्त्रोतों से निकलने वाले पानी को साथ लगते कलवर्ट तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे पानी की निकासी व्यवस्थित बनी रहे। इससे भविष्य में हाईवे की सड़क या उसके ढांचे को पानी के कारण नुकसान होने की आशंका को कम किया जा सकेगा। 15 दिन में पूरा होगा काम हाईवे का निर्माण कर रही गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के जीएम विकास नागर ने बताया कि एनएचएआई के निर्देश मिलते ही जल निकासी से संबंधित काम शुरू कर दिया गया है। जहां-जहां नए जलस्त्रोत सामने आए हैं, वहां पानी के बहाव की उचित दिशा तय की जा रही है। कंपनी ने पूरे चैनलाइजेशन कार्य को 15 दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। मंडी से पधर तक हाईवे के इस हिस्से को अगले महीने यातायात के लिए सुचारू करने की तैयारी है। इससे पहले बरसात के बाद सामने आई जल निकासी की समस्या को दूर किया जा रहा है। एनएचएआई और निर्माण कंपनी का प्रयास है कि हाईवे को यातायात के लिए खोलने से पहले पानी की निकासी से जुड़े जरूरी कार्य पूरे कर लिए जाएं, ताकि सड़क पर जलभराव या पानी के बहाव से भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो।