हिमाचल प्रदेश में बागवानी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक और पहल की गई है। राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने वीरवार को मंडी जिले के विकास खंड सुंदरनगर के अंतर्गत एचपी शिवा परियोजना के पलोहटा-II क्लस्टर में 25 लाख रुपये की लागत से स्थापित मोनोरेल का लोकार्पण किया। इस सुविधा से बागवानों को खाद, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री बगीचों तक पहुंचाने के साथ-साथ तैयार फलों की ढुलाई में भी मदद मिलेगी। जगत सिंह नेगी ने कहा कि बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए मोनोरेल महत्वपूर्ण पहल है। इससे भारी सामान को बगीचे के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना आसान होगा और फसल तैयार होने के बाद फलों को बाहर लाने में भी सुविधा मिलेगी। इससे बागवानों के श्रम और समय की बचत होगी तथा बागवानी कार्य अधिक सुविधाजनक बनेंगे। उन्होंने बताया कि पिछली बार पलोहटा-II क्लस्टर के दौरे के दौरान बागवानी कार्यों को आसान बनाने के लिए यहां मोनोरेल स्थापित करने का विचार सामने आया था। विदेशों में बागवानी क्षेत्र में इस तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। विभाग की ओर से स्थापित यह मोनोरेल फिलहाल पायलट परियोजना है। इसके परिणामों का आकलन किया जाएगा। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो प्रदेश के अन्य बागवानी क्लस्टरों में भी जरूरत के अनुसार ऐसी सुविधा स्थापित की जाएगी। बागवानी मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की एचपी शिवा परियोजना हिमाचल के निचले क्षेत्रों में बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की महत्वाकांक्षी योजना है। इस परियोजना पर लगभग 1,100 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके तहत प्रदेश के सात जिलों में करीब 6,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी गतिविधियों को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा के कारण परियोजना के कार्यों में कुछ विलंब हुआ है, लेकिन अब विभिन्न क्षेत्रों में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। मंडी जिले में लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी विकास का कार्य पूरा करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। फरवरी माह तक निर्धारित क्षेत्र में पौधरोपण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जगत सिंह नेगी ने बताया कि पलोहटा-II क्लस्टर में 28.44 हेक्टेयर क्षेत्र को जापानी फल यानी पर्सिमन की फ्यूयू किस्म की व्यावसायिक खेती के लिए विकसित किया गया है। यहां कुल 13,386 पौधे रोपित किए गए हैं। इस क्लस्टर से 85 किसान लाभान्वित हो रहे हैं, जिनमें 73 पुरुष और 12 महिला किसान शामिल हैं। मंत्री ने बताया कि पलोहटा-II क्लस्टर में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास पर लगभग 1.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें भूमि विकास पर करीब 32 लाख रुपये, सौर ऊर्जा आधारित बाड़बंदी पर 46.55 लाख रुपये और ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित करने पर लगभग 85.94 लाख रुपये व्यय किए गए हैं। किसानों को बागवानी के लिए जरूरी कृषि सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई है। क्लस्टर में 61 क्विंटल नीम खली पर 1,03,999 रुपये और मल्च शीट पर 14,46,432 रुपये खर्च किए गए हैं। पौधों की छंटाई के लिए आठ सेक्येटर भी दिए गए हैं, जिनकी लागत 24,000 रुपये है। जापानी फल की फ्यूयू किस्म के पौधों पर 20,59,544 रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा मनरेगा के तहत 5,32,180 रुपये व्यय किए गए हैं तथा किसानों के लिए आवश्यक उर्वरकों की व्यवस्था भी की गई है। अधिकारियों ने दी परियोजना की जानकारी इससे पहले जिला समन्वयक एचपी शिवा एवं विषय विशेषज्ञ उद्यान राजेश शर्मा ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर पूर्व सीपीएस सोहन लाल ठाकुर, राज्य अनुसूचित जाति, जनजाति विकास निगम के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल, हिमाचल प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष नरेश चौहान, हिमाचल प्रदेश एससी सेल के उपाध्यक्ष ब्रह्म दास चौहान, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दीप शर्मा, पलोहटा-II क्लस्टर के प्रधान मनीष शर्मा, निदेशक उद्यान सतीश शर्मा, अतिरिक्त निदेशक उद्यान विद्याप्रकाश बैंस, उपमंडलाधिकारी (ना.) सुंदरनगर अमर नेगी, उपनिदेशक मंडी संजय गुप्ता, उपनिदेशक बिलासपुर जगदीश वर्मा, डीएसपी भारत भूषण सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।