मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के विरोध में सोमवार को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी यानी भाकपा ने संयुक्त रूप से बालीचौकी में रैली निकाली। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया और उनके इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से संविधान और नागरिकों के मतदान के अधिकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर भी विरोध जताया। माकपा और भाकपा के नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर गैरकानूनी तरीके से मतदाता सूची से करीब साढ़े 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 महीने से दो अन्य चुनाव आयुक्त भी मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले चार महीने से चुनाव आयोग की कोई बैठक नहीं हुई, जबकि देश में एसआईआर जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया चल रही है। इन आरोपों के समर्थन में विस्तृत दस्तावेज या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध करवाई गई है या नहीं, इसकी जानकारी समाचार सामग्री में नहीं है। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मतदान के अधिकार के साथ शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार को भी प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। नेताओं ने दिल्ली सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की। माकपा नेताओं ने बताया कि इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने के लिए गांव-गांव और घर-घर अभियान चलाया गया है। बालीचौकी में आयोजित रैली और प्रदर्शन को माकपा राज्य कमेटी के सदस्य महेंद्र राणा, भाकपा जिला सचिव मेघ सिंह पालसरा, पीटीएफ के पूर्व बालीचौकी ब्लॉक प्रधान अमरजीत सिंह और रूप सिंह ने संबोधित किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने घोषणा की कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।