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देवी-देवताओं के आगमन से देवमय होने लगा ऐतिहासिक ढालपुर मैदान, कुल्लू दशहरा उत्सव की तैयारियां तेज

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव से पहले ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में देव परंपराओं की रौनक बढ़ने लगी है। घाटी के देवी-देवताओं के आगमन के साथ मैदान देवमय होने लगा है। रविवार शाम को कई देवी-देवता अपने हारियाणों और देवलुओं के साथ पूरे लाव-लश्कर के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे। रविवार शाम को देवता जमलू पीज, बीरनाथ गौहरी, मनु ऋषि, शैंशर और शिवराडी नारायण ढालपुर मैदान पहुंचे। इस दौरान देवी-देवताओं के आगे-आगे हारियाण ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते हुए आगे बढ़े। वहीं, देवी-देवता देवलुओं के कंधों पर सवार होकर मैदान पहुंचे। देवी-देवताओं के आगमन से ढालपुर में पारंपरिक देव संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। उत्सव शुरू होने से दो दिन पहले ही देवताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे क्षेत्र में दशहरे की रौनक बढ़ने लगी है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का आयोजन 21 से 27 अक्टूबर तक किया जाएगा। उत्सव को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। देवी-देवताओं के लिए ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में अस्थायी शिविर भी सजकर तैयार हो गए हैं। इन शिविरों में देवी-देवता उत्सव के सात दिनों तक विराजमान रहेंगे। कुल्लू दशहरा अपनी विशिष्ट देव परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। देवी-देवताओं का आगमन इस ऐतिहासिक उत्सव की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।

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