मानसून का दौर छंटने के बाद कुल्लू जिले में करीब दो माह से बंद साहसिक पर्यटन गतिविधियां फिर शुरू हो गई हैं। ब्यास नदी के किनारों पर राफ्टें उतार दी गई हैं, जबकि पैराग्लाइडिंग की उड़ानें भी शुरू हो गई हैं। साहसिक गतिविधियों के दोबारा शुरू होने से कुल्लू पहुंच रहे सैलानियों को रोमांच से भरे सफर का मौका मिल रहा है। ब्यास नदी में रिवर राफ्टिंग के लिए राफ्टें उतारे जाने के बाद नदी किनारे फिर से पर्यटन गतिविधियां दिखाई देने लगी हैं। वहीं, पैराग्लाइडिंग शुरू होने से आसमान में भी पर्यटकों का रोमांच लौट आया है। बताया जा रहा है कि पैराग्लाइडिंग के लिए 3500 रुपये और रिवर राफ्टिंग के लिए 200 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से शुल्क लिया जाएगा। मानसून के दौरान नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति को देखते हुए साहसिक गतिविधियों पर रोक रहती है। इस कारण राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और इससे जुड़े कारोबार से जुड़े लोगों को करीब दो माह तक काम बंद रखना पड़ा। अब गतिविधियां शुरू होने से इन लोगों के लिए रोजगार के अवसर फिर खुल गए हैं। सैलानी कुल्लू की प्राकृतिक सुंदरता के बीच रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। ब्यास नदी में राफ्टिंग के दौरान बहते पानी की लहरों के बीच रोमांचक अनुभव पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। वहीं पैराग्लाइडिंग के जरिए ऊंचाई से घाटी और पहाड़ों का नजारा देखने का अवसर मिल रहा है। साहसिक गतिविधियों के शुरू होने से स्थानीय टैक्सी ऑपरेटरों, गाइडों, राफ्ट संचालकों, पैराग्लाइडिंग पायलटों और अन्य पर्यटन कारोबारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से काम बंद रहने के बाद अब पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली है। पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सैलानियों की संख्या बढ़ेगी और इससे कुल्लू के पर्यटन कारोबार को गति मिलेगी। गतिविधियों के संचालन के दौरान मौसम, नदी के जलस्तर और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना जरूरी होगा, ताकि पर्यटक सुरक्षित तरीके से इन रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकें।