प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि हिमाचल में हजारों लोगों ने पानी की योजनाओं के लिए अपनी जमीनें दी हैं। सरकार बताए कि इन लोगों को कितना मुआवजा दिया गया। हमीरपुर सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में राणा ने मुख्यमंत्री की जमीन से जुड़े मामले को लेकर आरोप लगाए और कहा कि 769 कनाल जमीन को 76 करोड़ रुपये का बना लिया गया। उन्होंने दावा किया कि शपथ लेने के 20 दिन के भीतर परिवार के नाम 18 लाख रुपये का मुआवजा भी लिया गया। राणा ने कहा कि भाजपा को शिमला में मुख्यमंत्री कार्यालय बनने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रदेश पर बढ़ते कर्ज के बीच फिजूलखर्ची पर सवाल जरूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम कार्यालय में 20 करोड़ रुपये खर्च, 15 लाख की टेबल और 10 हजार रुपये प्रति मीटर के पर्दे लगाए जा रहे हैं। उन्होंने हेरिटेज भवन को लेकर भी सवाल उठाए। भाजपा नेताओं पर दर्ज एफआईआर को लेकर राणा ने कहा कि विधायक आशीष शर्मा ने जमीन मामले पर सवाल उठाया तो एफआईआर कर दी गई और पत्रकार के लिखने पर भी एफआईआर हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कथित विफलताओं और खर्चों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए एफआईआर का सहारा ले रही है। राणा ने कहा कि सरकार के कार्यों का जनता के सामने हिसाब लिया जाएगा।