हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के हमीरपुर मंडल में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन अब पर्यावरण संरक्षण के साथ निगम के खर्च को कम करने की दिशा में भी असर दिखाने लगा है। मंडल की अलग-अलग यूनिटों में चल रही 100 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों के कारण डीजल पर निर्भरता में कमी दर्ज की जा रही है। हमीरपुर मंडल के तहत देहरा, नालागढ़, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर समेत विभिन्न यूनिटों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है। इन बसों के बढ़ते इस्तेमाल से डीजल खपत में कमी आने लगी है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में हमीरपुर मंडल में 8,78,329 लीटर डीजल की खपत हुई थी। अगस्त में यह घटकर 8,29,599 लीटर रह गई। सितंबर में डीजल खपत में और कमी दर्ज की गई और यह आंकड़ा करीब 3,47,329 लीटर रहा। यानी उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में जुलाई की तुलना में डीजल खपत काफी कम रही। हालांकि अलग-अलग महीनों में बसों के संचालन, रूट और अन्य परिचालन परिस्थितियों का भी ईंधन खपत पर असर पड़ सकता है। ऐसे में केवल इन आंकड़ों को इलेक्ट्रिक बसों के कारण हुई बचत का पूरा माप नहीं माना जा सकता, लेकिन निगम के लिए ई-बसों का बढ़ता संचालन डीजल निर्भरता कम करने की दिशा में अहम कदम है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए डीजल की जरूरत नहीं होती। इससे निगम को पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में ईंधन खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर भी डीजल की कीमतों पर पड़ता है। इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल बढ़ने से निगम की ईंधन कीमतों पर निर्भरता को कम किया जा सकता है। ई-बसों का एक बड़ा फायदा पर्यावरण से जुड़ा है। डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसें सीधे तौर पर डीजल ईंधन नहीं जलातीं। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन को धीरे-धीरे बिजली आधारित बनाने से प्रदूषण कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है। हमीरपुर मंडल में इलेक्ट्रिक बसों का बढ़ता संचालन इस बदलाव की ओर संकेत कर रहा है कि एचआरटीसी का परिवहन तंत्र धीरे-धीरे डीजल से बिजली की ओर बढ़ रहा है। एचआरटीसी प्रबंधन के अनुसार यदि आने वाले महीनों में डीजल खपत में कमी का यह रुझान जारी रहता है तो निगम को ईंधन मद में संभावित बचत हो सकती है। इससे परिचालन लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। एचआरटीसी हमीरपुर मंडल के मंडलीय प्रबंधक राजकुमार पाठक के अनुसार, इलेक्ट्रिक बसों का बढ़ता संचालन निगम के खर्च को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में डीजल खपत में कमी का रुझान जारी रहा तो निगम को ईंधन खर्च में लाभ मिल सकता है।