यमुनानगर। पुलिस लाइन जगाधरी में बुधवार को पुलिस शहीदी स्मृति दिवस मनाया गया। इस अवसर पर देश की रक्षा और कर्तव्य निभाते हुए प्राण न्योछावर करने वाले पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को नमन किया। उन्होंने कहा कि शहीद जवानों की शहादत और वीरता को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर प्रत्येक पुलिसकर्मी को हर चुनौती का दृढ़ता से सामना करने का संकल्प लेना चाहिए। इस दौरान शहीद जवानों के परिजनों को सम्मानित किया गया और उनकी स्मृति में पौधरोपण भी किया गया। एसपी कमलदीप गोयल ने कहा कि शहीदों का बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने कहा, "शहीदों की चिताओं पर हर वर्ष लगेंगे मेले, वतन पर मरने वालों का यही निशां होगा।" उन्होंने बताया कि जिला यमुनानगर के सात वीर सपूतों ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उनकी शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा। इस अवसर पर पिछले एक वर्ष में देशभर में शहीद हुए 154 पुलिसकर्मियों के नाम भी पढ़े गए और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। 1959 में लद्दाख में शहीद हुए थे 10 पुलिसकर्मी एसपी ने पुलिस स्मृति दिवस के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि 21 अक्तूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सैनिकों के हमले में 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। ये जवान लापता साथियों की तलाश में निकले थे। हमले में सात पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे। देश की सीमा की निगरानी और सुरक्षा के दौरान दिए गए इस बलिदान की स्मृति में हर वर्ष 21 अक्तूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। जनवरी 1960 में पुलिस महानिरीक्षकों के सम्मेलन में भी ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया था। आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए जिले के सात जवान एसपी ने यमुनानगर के शहीद जवानों की गौरवगाथा बताते हुए कहा कि मुख्य सिपाही राजवीर सिंह एक अधिकारी के अंगरक्षक के रूप में तैनात थे। एक फरवरी 1992 को शहजादपुर थाना क्षेत्र में आतंकवादियों ने अधिकारी की कार पर हमला कर दिया। इसमें अधिकारी, उनकी पत्नी, बेटा और मुख्य सिपाही राजवीर सिंह शहीद हो गए थे। मुख्य सिपाही अजैब सिंह 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सिविल सचिवालय के वीआईपी गेट पर मानव बम विस्फोट में शहीद हुए थे। सिपाही रघुवीर सिंह छह फरवरी 1992 को बराड़ा क्षेत्र में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए। मुख्य सिपाही करण सिंह 30 अगस्त 1990 को बिलासपुर थाना क्षेत्र के गांव मरवा खुर्द में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान शहीद हुए थे। मुख्य सिपाही सुरेश कुमार 30 जुलाई 2010 को पंचकूला के यवनिका पार्क में मोटरसाइकिल चोर गिरोह की तलाश के दौरान हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे। 24 अगस्त 2010 को उन्होंने दम तोड़ दिया। उप निरीक्षक सुरेश कुमार दो जून 2019 को नारायणगढ़ क्षेत्र के बड़ागढ़ के पास चेकिंग के दौरान गोली लगने से शहीद हुए थे। वहीं, निरीक्षक बलजीत सिंह 31 मई 1992 को करनाल जिले में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल आरोपियों को पकड़ने के अभियान के दौरान शहीद हुए थे। पुलिस अधिकारियों ने अर्पित किए पुष्प कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष चौधरी, डीएसपी मुख्यालय कवलजीत सिंह, सुनील कुमार, रजत गुलिया, रमेश कुमार, पूजा, वेलफेयर इंस्पेक्टर कुसुम, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी व कर्मचारी और थाना-चौकी प्रभारी मौजूद रहे। सभी ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर वीर जवानों को नमन किया।