अनाज मंडी में धान खरीद से लेकर उठान तक व्यवस्था आज तक भी समुचित नहीं हो पाई है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। नमी की आड़ में खरीद के दौरान₹400 तक की कटौती की जा रही है तो वहीं उठाने होने से किसानों को भुगतान भी नहीं मिल पा रहा। यह आरोप लगाते हुए आज शनिवार को किसानों ने कड़ा रोष जाहिर किया और पिहोवा में मुख्यमंत्री नायब सैनी का पुतला जलाया। संयुक्त किसान मोर्चा के आहवान पर रोष प्रदर्शन करते हुए किसान नेता प्रिंस वडैच व अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि मंडियों में 17 प्रतिशत नमी (17 मोइस्चर) वाले धान पर भी राइस मिलरों द्वारा कटौती की जा रही है। वहीं, संबंधित खरीद एजेंसियों ने भी आंखें बंद कर रखी हैं और किसानों को राहत दिलाने के बजाय मूकदर्शक बनी हुई हैं। किसानों के अनुसार, जब किसानों ने एजेंसियों को बुलाकर अपना धान सरकारी रेट पर लिखवाया, तो उसके बावजूद आज 15 दिन बीत जाने पर भी धान की लिफ्टिंग नहीं हुई। सैणी फार्म, थाना फार्म और सारसा गांव के बड़ी संख्या में किसान अपनी इस समस्या को लेकर मार्केट कमेटी कार्यालय पिहोवा पहुंचे। इन किसानों ने 1 और 2 अक्टूबर को अपना धान सरकारी रेट पर लिखवाया था, लेकिन आज तक उसकी उठान नहीं हुई। किसानों ने गंभीर आरोप लगाया कि राइस मिलरों ने आपस में पूल बनाकर यह स्थिति पैदा कर दी है कि 17 प्रतिशत नमी वाले सरकारी रेट पर खरीदे गए धान को मिलों में उतारने से इनकार किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि इसके पीछे मंशा यह है कि दूसरे किसान भी एजेंसियों के माध्यम से अपना धान सरकारी रेट पर न लिखवा सकें और उन्हें मजबूर होकर निजी खरीदारों को कम दाम पर फसल बेचनी पड़े। किसानों ने सवाल उठाया कि जब धान सरकारी रेट पर दर्ज हो चुका है, तो उसकी उठान रोकने का अधिकार मिलरों को किसने दिया? यदि खरीद एजेंसियां किसानों का धान लिखवाने के बाद उसकी उठान सुनिश्चित नहीं करवा सकतीं, तो सरकारी खरीद व्यवस्था का क्या औचित्य रह जाता है? किसानों ने आरोप लगाया कि मिलरों और संबंधित एजेंसियों की कथित मिलीभगत का खामियाजा अन्नदाता भुगत रहा है। सरकार और प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करके लंबित धान की उठान करवानी चाहिए, नमी के नाम पर की जा रही कथित कटौती बंद करवानी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।