जींद। सफीदों रोड पर निर्जन गांव के पास अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करने पहुंची जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) की टीम की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कार्रवाई के दौरान टीम ने कहीं दुकानों के शटर उखाड़े तो कहीं केवल मामूली चाहरदीवारी गिराई। वहीं, कई जगह अवैध निर्माण को टीम ने छुआ तक नहीं। इससे कार्रवाई के तरीके को लेकर लोगों में डीटीपी के कथित दोहरे रवैये की चर्चा रही। डीटीपी की टीम जेसीबी मशीन लेकर सफीदों रोड पर निर्जन गांव के पास सुबह पहुंची थी। यहां दो अलग-अलग अवैध कॉलोनियों में निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की गई। टीम ने एक जगह लाइन में बनी दुकानों में से कुछ के शटर तोड़ दिए। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण अवैध था तो पूरी लाइन में एक समान कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन कई दुकानों को छोड़ दिया गया। कार्रवाई के दौरान एक स्थान पर छह से अधिक दुकानें एक लाइन में बनी हुई थीं। टीम ने इनमें से एक-दो दुकानों के शटर उखाड़कर कार्रवाई पूरी कर दी, जबकि आसपास बनी अन्य दुकानों को छोड़ दिया गया। इसी क्षेत्र में 20 से अधिक दुकानें बनी हुई हैं, लेकिन कार्रवाई का दायरा कुछ चुनिंदा निर्माण तक ही सीमित रहा। इससे लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि एक ही जगह पर समान प्रकृति के निर्माण होने के बावजूद कार्रवाई अलग-अलग तरीके से क्यों की गई। सड़क पार दूसरी कॉलोनी में एक दुकान पर ही चला जेसीबी का पंजा इसी दौरान सफीदों रोड के दूसरी तरफ स्थित एक अन्य अवैध कॉलोनी में भी टीम पहुंची। यहां भी कार्रवाई की गई, लेकिन जेसीबी का पंजा केवल एक दुकान पर चलाया गया। इसके बाद टीम वहां से लौट गई। आसपास के अन्य निर्माणों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। पहले भी खानापूर्ति के आरोप लगते रहे अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के खिलाफ डीटीपी विभाग की ओर से पहले भी कई बार कार्रवाई की गई है। आरोप है कि कई मौकों पर टीम जेसीबी लेकर पहुंचती है, कुछ निर्माण गिराए जाते हैं और इसके बाद अमला वापस लौट जाता है। इसके बाद उसी क्षेत्र में अन्य निर्माण जारी रहते हैं। यदि निर्माण नियमों के विपरीत हैं तो कार्रवाई सभी संबंधित निर्माणों पर समान रूप से होनी चाहिए। इस मामले में डीटीपी मनीष दहिया से जवाब के लिए फोन किया गया तो उन्होंने मैसेज में बात करने को कहा। जब उनसे यह बताया गया कि अवैध निर्माण पर की गई कार्रवाई को लेकर बात करनी है। इसके बाद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।