गांव चानौत में पेयजल की मांग को लेकर 35 दिन से चल रहे धरने और 10 दिन से चल रहे आमरण अनशन के बीच जिला प्रशासन ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ग्रामीणों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की। हांसी के जिला उपायुक्त राहुल नरवाल व हांसी एसपी विनोद कुमार ने अलग अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रशासन ने एक बार फिर ग्रामीणों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने और आंदोलन समाप्त करने की अपील की है। पांच बुजुर्ग ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं, जिनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। अनशनकारियों के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि हांसी शहर के लिए जा रही पेयजल पाइपलाइन से ही गांव को पानी उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अलग व्यवस्था नहीं, बल्कि शहरी लाइन से नियमित और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति चाहिए। हांसी जिला उपायुक्त राहुल नरवाल ने कहा कि चैनत गांव के लिए अलग से भाखड़ा का पानी उपलब्ध कराने हेतु राजली हेड से नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की पानी की मांग को पूरा किया जा रहा है, इसलिए अब धरना और आमरण अनशन समाप्त कर गांव के विकास कार्यों में सहयोग करना चाहिए। डीसी ने कहा कि प्रशासन गांव के लोगों के साथ है और उनकी समस्याओं का समाधान चाहता है। उन्होंने बताया कि आमरण अनशन पर बैठे पांच बुजुर्गों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। 82 वर्षीय टेकचंद, जो अस्थमा के मरीज हैं, सहित अन्य अनशनकारियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए धरनास्थल पर भेजी गई थी, लेकिन अनशनकारियों के सहयोग नहीं करने के कारण टीम को वापस लौटना पड़ा। डीसी ने कहा कि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अनशनकारियों के स्वास्थ्य को कोई गंभीर नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी स्वयं धरनारत लोगों की होगी। वहीं, हांसी के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आमरण अनशन पर बैठे बुजुर्गों की हालत गंभीर है। यदि किसी भी अनशनकारी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है। अगर उनकी मृत्यु होती है। धरना कमेटी के सदस्यों पर हत्या से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला भी दर्ज किया जायेगा। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग को इनका इलाज नहीं करने दे रहे है। कमेटी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।