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हिसार में शिक्षा के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर नौनिहाल

नवीन दलाल Updated Thu, 07 Aug 2025 01:06 PM IST

नगर निगम दायरे में आने वाले गांव सातरोड़ के प्राथमिक स्कूल में 1935 में बने कमरे बेहद जर्जर हालत में हैं। हिसार की विधायक सावित्री जिंदल के आवास से महज 3 किलोमीटर पर स्थित इस स्कूल में 155 विद्यार्थी हर रोज जान हथेली पर लेकर पढ़ते हैं। इन विद्यार्थियों को हर एक बारिश के बाद कई दिन पानी के अंदर से गुजर कर कक्षाओं तक पहुंचना पड़ता है। राजकीय प्राथमिक स्कूल सातरोड़ के हेड पिछले दस साल से स्कूल की कंडम बिल्डिंग को लेकर शिकायत भेज रहे हैं। पिछले एक साल में तीन बार शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं। पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियर मौका का मुआयना भी कर चुके हैं। इसके बाद भी स्कूल को कंडम घोषित नहीं किया जा रहा। स्कूल के तीन कमरों में लेंटर गिर रहा है। एक कमरे की हालत बेहद खराब होने पर इसे स्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। शिक्षकों ने अपने स्तर पर कमरे के बाहर नोटिस भी चस्पाया है। पहली से पांचवीं कक्षा तक के इस स्कूल में बारिश के बाद पानी भर जाता है। वीरवार को बारिश के बाद शुक्रवार दोपहर बाद तक इस स्कूल के दो कमरों में पानी भरा हुआ था। जिसके चलते एक कक्षा को स्टोर रूम में लगाना पड़ा। स्कूल के कार्यकारी मुख्य अध्यापक रामकिशन ने बताया कि स्कूल के कंडम भवन को लेकर कई बार पत्र लिख चुके हैं। स्कूल में सफाई कर्मचारी , चौकीदार की सुविधा नहीं है। बारिश का पानी भरने के बाद शिक्षकों को ही पानी निकालने को मजबूर होना पड़ता है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बधावड़ का रिपोर्ट कार्ड स्थापना वर्ष - 1952 विद्यार्थियों की संख्या -465 स्वीकृत शिक्षकों की संख्या - 27 कार्यरत शिक्षकों की संख्या 25 कमरों की संख्या 19 कंडम कमरे 07 कितने कमरों की आवश्यकता -10 शौचालय -- 2 शौचालय की जरूरत -3 जान जोखिम में डाल कर पढ़ाई कर रहे.. बरवाला। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बधावड़ स्कूल में कक्षा 6 से कक्षा बाहरवीं तक के 425 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। स्कूल में यदि कमरों की बात करें तो 19 कमरों के इस स्कूल में 7 कमरों की हालत काफी खस्ता है। लेकिन बावजूद इसके कक्षा 10वीं से बारहवीं तक के विद्यार्थी इन्हीं कमरों में ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जोकि बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर पढाई करनी पड़ रही है। विद्यालय में करीबन 25 अध्यापकों का स्टाफ है। स्कूल की व्यवस्थाओं में शौचालयों की बात करें तो शौचालयों की हालत भी काफी खराब है। यही हाल मिड-डे-मील कक्ष का भी है।

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