हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने गांव रावलवास में प्रगतिशील किसान कृष्ण कुमार के खेत का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने काबुली चने की नई किस्म एचए-5 की ऑर्गेनिक खेती का अवलोकन किया और इसकी खेती से जुड़े अनुभवों और फायदों पर चर्चा की। दलहन वैज्ञानिक डॉ. सुनील ने बताया कि एचए-5 किस्म की खासियत यह है कि यह सिर्फ 145 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि सामान्य चने की फसल को 150 दिन लगते हैं। यह किस्म कम सिंचाई और बिना रासायनिक उर्वरकों के भी बेहतर उत्पादन देती है, जिससे किसान एक एकड़ में 1 से 1.25 लाख रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने किसानों को नई और उन्नत किस्मों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बीजोपचार करके बिजाई करने से पैदावार अच्छी होती है और फसल रोगों से सुरक्षित रहती है। जहर मुक्त खेती के समर्थक हैं किसान कृष्ण कुमार कृष्ण कुमार ने कहा कि वह जहर मुक्त प्राकृतिक खेती के पक्ष में हैं और किसानों को भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वह आसपास के किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने बताया कि एक कनाल भूमि में सब्जी की खेती कर वह प्रति सीजन 30 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। फसल में रोगरोधक क्षमता, अप्रैल में होगी कटाई विज्ञानियों ने बताया कि एचए-5 किस्म में रोग प्रतिरोधी क्षमता अधिक है और इसमें मामूली उखेड़ा रोग दिखाई दिया, लेकिन इसका उत्पादन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। किसान कृष्ण कुमार ने 20 नवंबर में फसल की बिजाई की थी और यह 10 अप्रैल तक कटाई के लिए तैयार हो जाएगी। कई किसान रहे उपस्थित निरीक्षण के दौरान किसान मेनपाल पूनिया, राकेश सुंडा, मांगेराम, दिलीप सिंह, कपिल कुमार, अमित झाझड़िया, अजय गढ़वाल, हवा सिंह, साधुराम, सोनू, सुनील, दीपक स्वामी, पवन कासनिया सहित अन्य किसान मौजूद रहे।