यमुनानगर। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर ठगी करने वाले लोगों से घबराने की जरूरत नहीं है। डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। यदि किसी व्यक्ति के पास पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य विभाग के अधिकारी बनकर ऐसी कॉल आती है तो वह तुरंत इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाने में दें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर वीडियो कॉल पर रहने, बैंक संबंधी जानकारी देने या रुपये भेजने से बचें। यह बात पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने बुधवार को तिलक राज चड्ढा तकनीकी एवं प्रबंधन संस्थान में अमर उजाला फाउंडेशन के पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में बोलते हुए कही। एसपी कमलदीप गोयल ने विद्यार्थियों को कानून और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। एसपी ने कहा कि साइबर ठग लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाते हैं। उन्होंने अपने दोस्त के पिता के साथ हुई डिजिटल अरेस्ट की घटना का उदाहरण देकर विद्यार्थियों को समझाया कि ऐसी स्थिति में शांत रहना जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान निदेशिका डॉ. शैली गुप्ता ने की। साइबर ठगी से बचने के तरीकों पर कई किताबें लिख चुके साइबर विशेषज्ञ रजत ग्रोवर ने विद्यार्थियों से कहा कि सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले उसकी पहचान की जांच करनी चाहिए। निजी फोटो, मोबाइल नंबर, पता, ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी और पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। सोशल मीडिया खातों में मजबूत पासवर्ड और दो स्तर की सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए। साइबर थाना के निरीक्षक रविंद्र कुमार व उप निरीक्षक विशाल ने बताया कि साइबर अपराधी कई बार फर्जी लिंक, संदेश, नौकरी, इनाम और निवेश के नाम पर लोगों को निशाना बनाते हैं। किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या एप डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचनी चाहिए। उन्होंने एपीके फाइल, फर्जी लिंक की पहचान सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने विद्यार्थियों के मोबाइल में साइबर हमले से बचने के लिए एम-क्वच-2 एप भी डाउनलोड करवाई। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा से संबंधित सवाल भी एक्सपर्ट से पूछे।