चलिए चलते हुए मिलेंगे कभी
हम बिछड़ते हुए मिलेंगे कभी
ये भी दिलचस्प वाक़िआ होगा
ख़ुद से डरते हुए मिलेंगे कभी
पूछना जन्नतों के बारे में
जब उतरते हुए मिलेंगे कभी
एक तस्वीर की सफेदी में
रंग भरते हुए मिलेंगे कभी
आमने सामने हैं जैसे आज
फिर गुज़रते हुए मिलेंगे कभी
अपने अंदर की राइगानी में
सब ठहरते हुए मिलेंगे कभी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X