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मुझको भी पागल बनाएगी क्या ?

                
                                                         
                            मैं हूं प्यार का व्यापारी,
                                                                 
                            
मैं क्या जानू लाभ नुकसान
तुम इसको समझो,तुम इसे जानो मेरी जान

हमको बताओ कहां है तेरे दिल का वो कोना
जहां छुपा रखा है, मेरे लिए तू ने सारा सोना

भर दी है अपने प्यार से तूने मेरे दिल की तिज़ोरी
तेरे आगे फीका है हर धन , सुन तू अलबेली छोरी

बस अपना काम चल जाए,
उतना ही कमाना है
बाकी जो तुम्हारा साथ है तो , मेरा सारा जमाना है

पाने को तो इस दुनिया में बहुत कुछ पाना है
पर यह बंदा सबसे पहले तुझको समझा है ,
तेरा ही दीवाना है

सबको भूल गया हूँ ,एक तू है मुझको याद
मेरे लिए सबसे पहले तू है,सब हैं तुम्हारे बाद

बस कर पगली, मुझको रुलाएगी क्या
मेरे प्यार में तू इस कदर पागल है,
मुझको भी पागल बनाएगी क्या
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 hours ago

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