Urdu Poetry: उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
- राहत इंदौरी 

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इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता
- अकबर इलाहाबादी

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क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
आख़िरी बार मिल रही हो क्या
- जौन एलिया

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कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा
होता रहता है यूँ ही क़र्ज़ बराबर मेरा
- अतहर नफ़ीस

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अपने माथे की शिकन तुम से मिटाई न गई
अपनी तक़दीर के बल हम से निकाले न गए
- जलील मानिकपुरी 

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ये देखने के लिए उस ने फिर से तोड़ दिया
कि कैसे टूटा हुआ दिल दोबारा बनता है
- सैफ़ इरफ़ान

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Urdu Poetry: बदले हुए से लगते हैं अब मौसमों के रंग

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