बेरहम मौसम, बेहाल किसान: कपास की फसल में हर सप्ताह कीटनाशक का छिड़काव जरूरी
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- एक डिग्री औसत तापमान और कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ने से कीटों का प्रकोप
- बारिश कम हुई तो सूखे से फसल चौपट, ज्यादा हुई तो पौधा सूख जाएगा
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विस्तार
शेख समदानी को कपास की खेती को बचाने के लिए हर वक्त चौंकन्ना रहना पड़ता है। बारिश कम हुई तो सूखे से फसल चौपट, ज्यादा हुई तो पौधा सूख जाएगा, तापमान बढ़ने पर कीटों से बचाने के लिए हर हफ्ते कीटनाशक का छिड़काव।
महाराष्ट्र के नांदेड़ के गांव रायवाड़ी में रहने वाले शेख कपास की खेती में लगातार बढ़ रहीं समस्याओं पर कहते हैं, खेती जून से दिसंबर तक चलती है, इस बीच अगर बारिश अधिक हो गई तो पौधा गिर जाता है और सूख जाता है। पिछले साल पौधे सूख गए थे। इसे पानी तो चाहिए लेकिन धान जितना नहीं।
अगर खेत में आठ से दस दिन पानी रुक गया तो पौधा सूख जाएगा। मौसम में गर्मी बढ़ने से कीटों का हमला बढ़ता जा रहा है। कीटों से कपास की फसल को बचाने के लिए समदानी जैसे किसानों को फसल में आठ से दस बार कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता है। यहां तक कि बीटी कॉटन में भी कीटों की समस्या बढ़ती जा रही है। कीटों की समस्या वातावरण में आई गर्मी से है।
मुश्किल : बीटी कपास में भी कीट
बीटी कपास की शुरूआत इसलिए की गई थी कि किसानों की आय बढ़ेगी। कीट व बीमारियां कम लगेंगी। पर इसमें भी कीट लगने लगे हैं। हाइब्रिड कपास किसान महंगा खरीदते हैं। एक बार ही बुआई कर सकते हैं। इससे किसानों का खर्च बढ़ रहा है। हालांकि कुछ वैराइटीज हैं जिन्हें हर साल बो सकते हैं।
संकट गहराने के आसार...
केंद्रीय बरानी कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रीडा) की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण भारत के 27 जिलों में जून में बारिश कम होने की बात कही गई है। इससे कपास की खेती पर और भी संकट गहराने के आसार हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में सूखे और बाढ़ जैसे हालात बढ़ेंगे। देश के 48 जिलों का 15 प्रतिशत हिस्सा सूखा प्रभावित है, इसमें से 26 जिले राजस्थान और गुजरात के हैं।
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रॉप रिसर्च इन सेमी एरिड ट्रॉपिक्स (इक्रीसैट) में काम कर चुके वैज्ञानिक डॉ. सीवी समीर कहते हैं, कपास सबसे अधिक दक्षिण में ही होता है। दक्षिण में किसान बारिश के हिसाब से ही कपास की खेती करते हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन की वजह से दक्षिणी क्षेत्रों में 50 से 60 फीसदी बारिश कम हो रही है।
जहां हो रही है, वहां 50 से 60 दिन की बारिश अब 30 से 40 दिनों में ही हो जाती है। डॉ. समीर कहते हैं, कपास के लिए 35 से 37 डिग्री तापमान अच्छा माना जाता है। एक डिग्री औसत तापमान व कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ने से तीन तरह के कीटों व्हाइट फ्लाई, जॉसिड व पिंक वॉल वार्म का प्रकोप बढ़ गया है।
इनसे फसल बचाने के लिए किसान छह माह की फसल में 10 बार तक स्प्रे कर रहे हैं। डॉ. सीवी समीर कहते हैं, दक्षिण में सूखा बढ़ रहा है, इसलिए किसानों को मोटे अनाजों की खेती को ज्यादा तवज्जो देनी चाहिए।
लाख मीट्रिक टन में प्रमुख उत्पादक
| देश | उत्पादन |
| भारत | 63.5 |
| चीन | 58.9 |
| अमेरिका | 45.5 |
| ब्राजील | 20 |
| पाकिस्तान | 17.9 |