बच्चों के संवारने के लिए हर सुख त्यागे

Hamirpur Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। मां की ममता अनमोल है। मां स्वयं कष्ट सहते हुए बच्चे को हर सुख देती है। मां की गोद में बच्चे को जो सुख मिलता है उसे शब्दों में पिरोया नहीं जा सकता। उसकी गोद बच्चे के लिए जन्नत से कम नहीं है। वह अपने लाल के लिए हंसते हंसते हर गम सहती है। आज मदर्स डे है, हमीरपुर की उस मां के जज्बे को सलाम, जिसने बच्चों का जीवन संवारने को हर सुख त्याग दिए। सभी शिक्षिका की तारीफ करते नहीं अघाते हैं।
कुंडौरा गांव निवासी प्रेमादेवी यादव की शादी महोबा जनपद के खन्ना थानाक्षेत्र के कुलकुंआ गांव के रामऔतार यादव से हुई। पति साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे। रामऔतार ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, जबकि प्रेमा देवी बीटीसी करने के बाद कुंडौरा गांव में प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थीं। शादी के बाद उनके दो संतानें हुईं बेटी बेटी उमा तथा बेटा श्याम मनोहर। ससुराल में शिक्षा का माहौल न होने पर प्रेमा ने पति से बच्चों की पढ़ाई के लिए बात की। रामऔतार की सहमति के बाद बच्चों के साथ कुंडौरा आ गईं। अपना सुख-चैन त्याग कर प्रेमा बच्चों का करियर संवारने में जुट गईं। उनकी प्राथमिक शिक्षा अपने स्कूल में में कराई। उसके बाद बेटे को दसवीं व बारहवीं की पढ़ाई के लिए कानपुर भेज दिया। पुत्री उमा को एमए कराने के बाद शादी कर दी। उधर, शिक्षिका बेटे श्याम का हमेशा उत्साहवर्धन करतीं थीं। अंतत: मां का आशीर्वाद और बेटे की लगन रंग लाई। 2010 की सिविल सेवा परीक्षा में बेटे का चयन हुआ। शिक्षिका का पुत्र कोलकाता में असिस्टेंट इनकम टैक्स कमिश्नर के पद पर तैनात है।

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