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आईआईसीटी से कर सकते हैं बीटेक
Bhadohi
Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
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भदोही। भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के बी.टेक कोर्स में कालीन उद्योग को प्रतिनिधित्व देने का निर्णय अच्छा साबित हो रहा है। कालीन उद्यमियों की मांग पर संस्थान ने गत वर्ष इस पर निर्णय लेते हुए 12 सीटें उद्योग को प्रायोजित करने के लिए आरक्षित कर दी थी। इससे कालीन उद्योग के लोग मेधावी छात्रों को इस कोर्स के लिए प्रायोजित कर पाते हैं।
आईआईसीटी द्वारा जब संस्थान में कारपटे एंड टेक्सटाईल टेक्नालाजी में बीटेक कोर्स शुरू किया था तो इसका लाभ कालीन उद्योग को नहीं मिल रहा था। कालीन परिक्षेत्र में संस्थान के होते हुए भी इसका लाभ नहीं मिलने पर उद्योग के लोगों ने इसमें उद्योग प्रायोजित छात्रों के लिए सीटें वस्त्र मंत्रालय से मांगी थी। मांग को स्वीकार किए जाने के बाद से इसमें क्षेत्र के अथवा कालीन उद्योग में कैरियर बनाने वाले छात्रों के लिए काफी सहुलियत हो गई। आईआईसीटी के निदेशक, प्रो.केके गोस्वामी ने बताया कि उद्योग प्रायोजित किसी छात्र को इंजीनियरिंग में डिप्लोमा होना अथवा विज्ञान में स्नातक होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा सबसे बड़ी आवश्यकता यह होगी कि वह किसी कालीन निर्यातक द्वारा प्रायोजित हो।
उन्होंने यह भी बताया कि 60 प्रतिशत अंक पाकर इंटरमीडिएट पास करने वाले छात्र भी यहां बीटेक कर सकते हैं। ऐसे छात्रों को सेंट्रल काउंसिलिंग बोर्ड (सीसीबी) के प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने का इंतजार करना होगा। निदेशक ने बताया कि सीसीबी की प्रक्रिया समाप्ति के बाद जो सीटें खाली रह जाएंगी उनमें इंटरमीडिएट के मेधावी छात्र को देने का प्रावधान है। बशर्ते ऐसे छात्र 60 प्रतिशत अंक व पीसीएम में 65 प्रतिशत अंक पाकर पास हुए हों। उन्होंने खास बात यह बताई कि इन छात्रों के लिए एआईईईई में बैठने की कोई अनिवार्यता नहीं है।
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आईआईसीटी द्वारा जब संस्थान में कारपटे एंड टेक्सटाईल टेक्नालाजी में बीटेक कोर्स शुरू किया था तो इसका लाभ कालीन उद्योग को नहीं मिल रहा था। कालीन परिक्षेत्र में संस्थान के होते हुए भी इसका लाभ नहीं मिलने पर उद्योग के लोगों ने इसमें उद्योग प्रायोजित छात्रों के लिए सीटें वस्त्र मंत्रालय से मांगी थी। मांग को स्वीकार किए जाने के बाद से इसमें क्षेत्र के अथवा कालीन उद्योग में कैरियर बनाने वाले छात्रों के लिए काफी सहुलियत हो गई। आईआईसीटी के निदेशक, प्रो.केके गोस्वामी ने बताया कि उद्योग प्रायोजित किसी छात्र को इंजीनियरिंग में डिप्लोमा होना अथवा विज्ञान में स्नातक होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा सबसे बड़ी आवश्यकता यह होगी कि वह किसी कालीन निर्यातक द्वारा प्रायोजित हो।
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उन्होंने यह भी बताया कि 60 प्रतिशत अंक पाकर इंटरमीडिएट पास करने वाले छात्र भी यहां बीटेक कर सकते हैं। ऐसे छात्रों को सेंट्रल काउंसिलिंग बोर्ड (सीसीबी) के प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने का इंतजार करना होगा। निदेशक ने बताया कि सीसीबी की प्रक्रिया समाप्ति के बाद जो सीटें खाली रह जाएंगी उनमें इंटरमीडिएट के मेधावी छात्र को देने का प्रावधान है। बशर्ते ऐसे छात्र 60 प्रतिशत अंक व पीसीएम में 65 प्रतिशत अंक पाकर पास हुए हों। उन्होंने खास बात यह बताई कि इन छात्रों के लिए एआईईईई में बैठने की कोई अनिवार्यता नहीं है।
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