मां के आंचल को दूषित नहीं करना

Bhadohi Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अविरल गंगा निर्मल गंगा के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान के 108 दिन पूरे होने एवं स्वामी सानंदजी और गंगा प्रेमी भिक्षु के तप के समर्थन में मनीषी परिषद की ओर से महाराजगंज में जनचेतना रैली निकाली गई। रैली महाराजगंज बाजार से होते हुए सिद्धनाथ गंगा घाट तक गई। रैली के बाद आयोजित गोष्ठी में गंगा के निर्मलीकरण की मांग की।
इस मौके पर केएनपीजी के अंग्रेजी विभाग के डॉ. पीएस मिश्र ने गंगा के ऐतिहासिक महात्म का विवेचन किया। दक्षिण भारत के चोज राजाओं का गंगा प्रेम बताते हुए कहा कि हमें भी अपनी मां के आंचल को अपने आचरण से दूषित नहीं करना चाहिए। यदि हम गंगा की स्वच्छता के लिए तत्पर रहेंगे तो निश्चित रूप से वे अविरल और निर्मल होंगी। डॉ. अशोक मिश्र ने गंगाजी में पाए जाने वाले सूंस के विलुप्त होने पर चिंता प्रकट की। रमाशंकर शुक्ल ने गंगा रक्षा के लिए मातृशक्ति का आह्वान किया। डॉ. कामिनी वर्मा ने गंगा की अविरलता के लिए ठोस प्रयास की जरूरत पर बल दिया। मनीष पांडेय ने कहा गंगा की अविरलता के लिए छात्र शक्ति को कंधे से कंधा मिलाकर प्रयास करना होगा। तभी सार्थक परिणाम सामने आएंगे। डॉ. आलोक त्रिपाठी ने कहा युवा शक्ति गंगा की अविरलता के लिए संगठित हो जाए तो स्वामी सानंदजी की तपस्या सफलीभूत हो सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विंध्यवासिनी त्रिपाठी ने की। इस अवसर पर शिवपूजन शुक्ल, विनय दुबे, सियाराम चौरसिया, चंद्रभूषण पांडेय, विजयशंकर पांडेय, डॉ. ओंकारनाथ त्रिपाठी ने विचार व्यक्त किए। जनचेतना रैली का नेतृत्व मनीष पांडेय, रत्नेश्वर त्रिपाठी, राजेंद्र बघेल ने की।

देखो मां की धारा लगती है कितनी प्यारी ...
संवाददाता
औराई। गंगा निर्मलीकरण के लिए निकाली गई जन चेतना रैली के बाद महाराजगंज में आयोजित काव्य गोष्ठी में गंगा के निर्मलीकरण पर कविताएं कहीं गईं। विद्यापति कोकिल ने कहा देखो मां की धारा लगती है कितनी प्यारी? कर्मराज किसलय ने कहा प्रकृति की रचना में अनावश्यक हस्तक्षेप विनाश का कारण है। मंजुल जी ने पढ़ा हम शांति दूत बन गांव गली में ऐसी अलख जगाएंगे, संकल्प हमारा पूरा है हम गंगा तुम्हें बचाएंगे। निशांतजी ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सानदं गंगा का कठोर तप तुम्हारा, साधना निर्जल सुव्रत पावन चले निरंतर, सिद्धनाथ घाट से प्रणाम हमारा। कार्यक्रम का संयोजन डा. सविता भारद्वाज, संचालन डा. कृष्णावतार त्रिपाठी राही ने किया। आए लोगों का आभार प्रकाश डॉ. विद्याशंकर त्रिपाठी ने किया।

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