{"_id":"119-92255","slug":"Badaun-92255-119","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट की टिप्पणी, क्यों न हो गृह सचिव पर कार्रवाई"}
हाईकोर्ट की टिप्पणी, क्यों न हो गृह सचिव पर कार्रवाई
Badaun
Updated Wed, 23 Apr 2014 05:34 AM IST
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बदायूं। बरेली में हुए मुकुल गुप्ता एनकाउंटर मामले में नया मोड़ आया है। मुकुल के पिता की तहरीर पर हाईकोर्ट की बेंच ने प्रदेश के गृह सचिव से जवाब-तलब किया है कि आखिर क्यों उन्होंने आरोपी आईपीएस जे. रविंद्र गौड़ के खिलाफ मुकदमे की अनुमति नहीं दी। निजी शपथ पत्र तलब करते हुए कोर्ट ने यह भी पूछा है कि आखिर क्यों न उनके ही खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बता दें कि 30 जून 2007 को बदायूं निवासी एमआर मुकुल गुप्ता का बरेली में पुलिस टीम ने एनकाउंटर कर दिया था। ट्रेनी आईपीएस जे. रवींद्र गौड़ के नेतृत्व वाली पुलिस टीम पर तभी से तलवार लटकी थी। पिछले साल सीबीआई विवेचना में भी एनकाउंटर की सत्यता पर संदेह जताते हुए टीम को कटघरे में खड़ा किया गया था। इसके बाद मानवाधिकार आयोग ने भी खेद जताते हुए मुआवजे का चेक मुकुल के पिता रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता को भेजा था।
इस मामले में अक्तूबर 2013 में सीबीआई ने लखनऊ के तत्कालीन एसएसपी गौड़ के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी उत्तर प्रदेश सरकार से मांगी थी तब गृह सचिव की ओर से इस पर असहमति जताते हुए मंजूरी देने से इंकार कर दिया गया था। इसके जवाब में विजेंद्र गुप्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने रिट याचिका डालकर अपने बेटे की हत्या के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। इसी पंद्रह अक्तूबर को हाईकोर्ट के न्यायधीश अरुण टंडन और अख्तर हुसैन खां की पीठ ने इस पर फैसला सुना दिया अब इसकी प्रति भी विजेंद्र गुप्ता के पास आ गई है। आदेश में गृह सचिव को तीस अप्रैल तक निजी शपथपत्र दाखिल करके केस के बारे में सरकार की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। पूछा गया है कि लोक सेवक के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई? पीठ ने यह भी पूछा है कि आखिर क्यों न इस मामले में जिम्मेदार मानते हुए गृह सचिव के खिलाफ ही कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट की टिप्पणी से पीड़ित को न्याय की उम्मीद जगी है।
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यह थी फर्जी एनकाउंटर की कहानी
घटना के वक्त एएसपी गौड़ इस एनकाउंटर टीम के प्रभारी थे। टीम में उनके अलावा दस पुलिसकर्मी और भी थे। इनमें सीबी गंज एसओ रहे विकास सक्सेना भी शामिल रहे। आरोप था कि मुकुल और उसके साथी शातिर बदमाश थे और बैंक लूटने जा रहे थे। इस बीच सूचना मिलने पर टीम ने उनका पीछा किया। आरोपियों ने जब खुद को घिरा पाया तो पुलिस टीम पर फायर झोंक किया। फिर सेल्फ डिफेंस में गौड़ के गनर गौरीशंकर विश्वकर्मा ने अपनी एके 47 रायफल से मुकुल को गोली मार दी। इस बात का जिक्र पुलिस ने खुद एनकाउंटर की एफआईआर में किया है। हालांकि पुलिस की लाख कोशिश के बाद भी मुकुल को शातिर घोषित नहीं किया जा सका। मुकुल के खिलाफ बरेली से बदायूं तक कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। वह बदायूं के एक प्रतिष्ठित परिवार का युवक था जो बरेली की दवा फर्म में काम कर रहा था।
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बता दें कि 30 जून 2007 को बदायूं निवासी एमआर मुकुल गुप्ता का बरेली में पुलिस टीम ने एनकाउंटर कर दिया था। ट्रेनी आईपीएस जे. रवींद्र गौड़ के नेतृत्व वाली पुलिस टीम पर तभी से तलवार लटकी थी। पिछले साल सीबीआई विवेचना में भी एनकाउंटर की सत्यता पर संदेह जताते हुए टीम को कटघरे में खड़ा किया गया था। इसके बाद मानवाधिकार आयोग ने भी खेद जताते हुए मुआवजे का चेक मुकुल के पिता रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता को भेजा था।
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इस मामले में अक्तूबर 2013 में सीबीआई ने लखनऊ के तत्कालीन एसएसपी गौड़ के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी उत्तर प्रदेश सरकार से मांगी थी तब गृह सचिव की ओर से इस पर असहमति जताते हुए मंजूरी देने से इंकार कर दिया गया था। इसके जवाब में विजेंद्र गुप्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने रिट याचिका डालकर अपने बेटे की हत्या के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। इसी पंद्रह अक्तूबर को हाईकोर्ट के न्यायधीश अरुण टंडन और अख्तर हुसैन खां की पीठ ने इस पर फैसला सुना दिया अब इसकी प्रति भी विजेंद्र गुप्ता के पास आ गई है। आदेश में गृह सचिव को तीस अप्रैल तक निजी शपथपत्र दाखिल करके केस के बारे में सरकार की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। पूछा गया है कि लोक सेवक के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई? पीठ ने यह भी पूछा है कि आखिर क्यों न इस मामले में जिम्मेदार मानते हुए गृह सचिव के खिलाफ ही कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट की टिप्पणी से पीड़ित को न्याय की उम्मीद जगी है।
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यह थी फर्जी एनकाउंटर की कहानी
घटना के वक्त एएसपी गौड़ इस एनकाउंटर टीम के प्रभारी थे। टीम में उनके अलावा दस पुलिसकर्मी और भी थे। इनमें सीबी गंज एसओ रहे विकास सक्सेना भी शामिल रहे। आरोप था कि मुकुल और उसके साथी शातिर बदमाश थे और बैंक लूटने जा रहे थे। इस बीच सूचना मिलने पर टीम ने उनका पीछा किया। आरोपियों ने जब खुद को घिरा पाया तो पुलिस टीम पर फायर झोंक किया। फिर सेल्फ डिफेंस में गौड़ के गनर गौरीशंकर विश्वकर्मा ने अपनी एके 47 रायफल से मुकुल को गोली मार दी। इस बात का जिक्र पुलिस ने खुद एनकाउंटर की एफआईआर में किया है। हालांकि पुलिस की लाख कोशिश के बाद भी मुकुल को शातिर घोषित नहीं किया जा सका। मुकुल के खिलाफ बरेली से बदायूं तक कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। वह बदायूं के एक प्रतिष्ठित परिवार का युवक था जो बरेली की दवा फर्म में काम कर रहा था।