{"_id":"119-86276","slug":"Badaun-86276-119","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले वरदान अब अभिशाप बन रही विदेशी मुद्रा"}
पहले वरदान अब अभिशाप बन रही विदेशी मुद्रा
Badaun
Updated Tue, 04 Feb 2014 02:35 PM IST
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दबतोरी। हवाला के जरिये रकम मंगाने के मामले में क्षेत्र के दो लोगों को गाजियाबाद में गिरफ्तार कर लिया गया। बताते हैं कि पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। इससे एक बार फिर क्षेत्र की बदनामी हुई है।
चौकी क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांव विदेशी मुद्रा की बैंक खातों के जरिये आवक को खासे चर्चित हैं। दबतोरी, संग्रामपुर, पपगांव, लक्ष्मीपुर आदि गांवों में सीबीआई और रॉ सरीखी एजेसियां कई बार छापामारी करके शातिरों को पकड़ चुकी हैं। इनके खिलाफ जांच और निगरानी भी लगातार यही एजेंसियां कर रही हैं। गाजियाबाद में संग्रामपुर निवासी इशराज और उसके साथी अकबर को भी हाल ही में गिरफ्तार किया गया है। बताते हैं कि दिल्ली में रखकर इनसे पूछताछ की जा रही है। करीब दो सप्ताह पहले संभल एसओजी ने यहां लक्ष्मीपुर गांव की साप्ताहिक बाजार में छापा मारा था। वहां से टीम ने दबतोरा गांव निवासी मेराज तथा इसके भाई मुस्तफा को गिरफ्तार किया था। तब बाजार में हड़कंप मच गया था। बहजोई की एक बैंक से दस लाख रुपये की रकम निकालने का इन पर आरोप था। अभी तक यह गांव नहीं लौटे हैं।
नाइजीरिया समेत कई देशों से आता है धन
इस धंधे के माहिर लोग क्षेत्र के ग्रामीणों की आईडी और फोटो लेकर स्थानीय बैंकों में उनके खाते खुलवाते हैं। फिर उनकी पासबुक से लेकर एटीएम कार्ड तक अपने पास रख लेते हैं। इन खातों में विदेशों से बड़ी रकम आती है जिसे धंधेबाज निकाल लेते हैं। इसका पांच फीसदी तक हिस्सा खाताधारक को घर बैठे भिजवा दिया जाता है। कुछ फीसदी शातिर खा जाते हैं और बाकी रकम उस व्यक्ति को पहुंचा दी जाती है जहां के लिए उसे विदेश से भेजा गया था। सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं यह रकम अपराधियों के पास तो नहीं भेजी जा रही। एक साल पहले यहां छापा मारने आए सीबीआई लखनऊ के इंस्पेक्टर जुगलकिशोर ने इस बात की जानकारी स्थानीय पुलिस और मीडिया को दी थी। उन्होंने फरार लोगों के घर पर नोटिस भी चस्पा किए थे। अब तक ऐसे दर्जनों लोगों को पुलिस और एजेंसियां गिरफ्तार कर चुकी हैं। इनके खिलाफ दिल्ली, मुंबई, जयपुर, कानपुर, कलकत्ता, सहारनपुर और गाजियाबाद में मुकदमे कायम हैं।
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इंसेट
चंद बरस में बन गए करोड़पति
इन गांवों के लोग कुछ ही साल में करोड़पति हो गए हैं। दबतोरा के एक व्यक्ति ने बरेली के ट्रांसपोर्ट नगर में आलीशान कोठी बनवाई है। आंवला और आसपास के इलाके की महंगी जमीनें इन्होंने खरीद रखी हैं। इनके बैनामे भी सीधे अपने नाम न कराकर रिश्तेदारों के नाम कराए हैं। अब चौकी क्षेत्र के इन गांवों में भी आलीशान इमारतें बन गई हैं।
रिकार्ड खंगाला तो नपे चौकी प्रभारी
इन गांवों के शातिरों की जांच भले ही शीर्ष एजेंसियां कर रही हैं पर स्थानीय पुलिस इनसे पर्याप्त दूरी बनाए रखती है। बता दें कि समय-समय पर दबतोरी चौकी पर तैनात तेजतर्रार प्रभारियों ने इस रैकेट को खंगालने और कार्रवाई के प्रयास किए। तब कुछ ही समय में उनके ट्रांसफर हो गए। इनमें एसआई नरेश कश्यप, जसपाल सिंह ग्वाल, अजय कुमार चौधरी, वीके सिंह और सीपी पांडेय आदि के नाम शामिल हैं। यह तबादले भले ही संयोग रहे हों पर अब नए चौकी प्रभारी इस पचड़े से दूर ही रहते हैं।
चौकी क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांव विदेशी मुद्रा की बैंक खातों के जरिये आवक को खासे चर्चित हैं। दबतोरी, संग्रामपुर, पपगांव, लक्ष्मीपुर आदि गांवों में सीबीआई और रॉ सरीखी एजेसियां कई बार छापामारी करके शातिरों को पकड़ चुकी हैं। इनके खिलाफ जांच और निगरानी भी लगातार यही एजेंसियां कर रही हैं। गाजियाबाद में संग्रामपुर निवासी इशराज और उसके साथी अकबर को भी हाल ही में गिरफ्तार किया गया है। बताते हैं कि दिल्ली में रखकर इनसे पूछताछ की जा रही है। करीब दो सप्ताह पहले संभल एसओजी ने यहां लक्ष्मीपुर गांव की साप्ताहिक बाजार में छापा मारा था। वहां से टीम ने दबतोरा गांव निवासी मेराज तथा इसके भाई मुस्तफा को गिरफ्तार किया था। तब बाजार में हड़कंप मच गया था। बहजोई की एक बैंक से दस लाख रुपये की रकम निकालने का इन पर आरोप था। अभी तक यह गांव नहीं लौटे हैं।
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नाइजीरिया समेत कई देशों से आता है धन
इस धंधे के माहिर लोग क्षेत्र के ग्रामीणों की आईडी और फोटो लेकर स्थानीय बैंकों में उनके खाते खुलवाते हैं। फिर उनकी पासबुक से लेकर एटीएम कार्ड तक अपने पास रख लेते हैं। इन खातों में विदेशों से बड़ी रकम आती है जिसे धंधेबाज निकाल लेते हैं। इसका पांच फीसदी तक हिस्सा खाताधारक को घर बैठे भिजवा दिया जाता है। कुछ फीसदी शातिर खा जाते हैं और बाकी रकम उस व्यक्ति को पहुंचा दी जाती है जहां के लिए उसे विदेश से भेजा गया था। सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं यह रकम अपराधियों के पास तो नहीं भेजी जा रही। एक साल पहले यहां छापा मारने आए सीबीआई लखनऊ के इंस्पेक्टर जुगलकिशोर ने इस बात की जानकारी स्थानीय पुलिस और मीडिया को दी थी। उन्होंने फरार लोगों के घर पर नोटिस भी चस्पा किए थे। अब तक ऐसे दर्जनों लोगों को पुलिस और एजेंसियां गिरफ्तार कर चुकी हैं। इनके खिलाफ दिल्ली, मुंबई, जयपुर, कानपुर, कलकत्ता, सहारनपुर और गाजियाबाद में मुकदमे कायम हैं।
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इन गांवों के लोग कुछ ही साल में करोड़पति हो गए हैं। दबतोरा के एक व्यक्ति ने बरेली के ट्रांसपोर्ट नगर में आलीशान कोठी बनवाई है। आंवला और आसपास के इलाके की महंगी जमीनें इन्होंने खरीद रखी हैं। इनके बैनामे भी सीधे अपने नाम न कराकर रिश्तेदारों के नाम कराए हैं। अब चौकी क्षेत्र के इन गांवों में भी आलीशान इमारतें बन गई हैं।
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इन गांवों के शातिरों की जांच भले ही शीर्ष एजेंसियां कर रही हैं पर स्थानीय पुलिस इनसे पर्याप्त दूरी बनाए रखती है। बता दें कि समय-समय पर दबतोरी चौकी पर तैनात तेजतर्रार प्रभारियों ने इस रैकेट को खंगालने और कार्रवाई के प्रयास किए। तब कुछ ही समय में उनके ट्रांसफर हो गए। इनमें एसआई नरेश कश्यप, जसपाल सिंह ग्वाल, अजय कुमार चौधरी, वीके सिंह और सीपी पांडेय आदि के नाम शामिल हैं। यह तबादले भले ही संयोग रहे हों पर अब नए चौकी प्रभारी इस पचड़े से दूर ही रहते हैं।