{"_id":"119-55336","slug":"Badaun-55336-119","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनआरएचएम -- घोटालेबाजों पर नहीं कस सका शिकंजा"}
एनआरएचएम -- घोटालेबाजों पर नहीं कस सका शिकंजा
Badaun
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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एनआरएचएम की जननी सुरक्षा योजना के समरेर में पकड़े गए थे 168 फर्जी केस
तत्कालीन एडी हेल्थ ने प्रमुख सचिव, डीजी हेल्थ को पत्र लिख बताया था जान को खतरा
सुशील कुमार
बदायूं। मायावती के शासनकाल में इस जिले में उजागर हुए घोटाले पर कार्रवाई आज भी अधर में है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत जिले में 168 फर्जी केस पकड़े गए थे। तत्कालीन एडी हेल्थ ने पत्र के माध्यम से प्रमुख सचिव, डीजी हेल्थ तक को इसकी जानकारी दी लेकिन किसी भी घोटालेबाज के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। एडी ने घोटालेबाजों के नाम खोलने पर खुद पर हमले की आशंका भी जताई थी।
तत्कालीन एडी हेल्थ ने प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में उल्लेख किया है कि दो दिसंबर 11 तक समरेर पीएचसी पर डा. वीरेश कुमार प्रभारी थे। इनके कार्यकाल में इस तिथि तक जननी सुरक्षा के कार्य में बड़े स्केल पर घोटाला हुआ है। इसके सुबूतों की फोटो स्टेट उनके दफ्तर में सुरक्षित है और मूल कॉपी स्वास्थ्य मंत्री को घोटाला उजागर करने वाले चिकित्सक डा. गौतम ने दिखाई है। सरकारी धन की लूट में कर्मचारियों के साथ अधिकारी भी शामिल रहे हैं। नाम अभी गोपनीय रखे जा रहे हैं, ताकि मुझे कोई शारीरिक क्षति न पहुंचे। बेईमानी करने के लिए जारी किए गए चेकों की संख्या 55 और संदेहपूर्ण चेकों की संख्या 160 से अधिक रही है। ऐसे व्यक्तियों के नाम से भी चेक जारी करके कैश करवाए गए हैं जो कहीं हैं ही नहीं।
एक व्यक्ति जो मर चुका है, किसी अन्य से दस्तखत कराकर उसे जिंदा भी दिखा दिया गया है। जिस व्यक्ति अमनपाल के दस्तखत कराए गए हैं वह खुर्दी गांव का है। समरेर कांड की जांच से संबंधित अधिकारी उसे दिवंगत लिख रहे हैं। दिवंगत व्यक्ति हस्ताक्षर कैसे कर सकता है? यहां तक हुआ है कि पंजाब और प्राइवेट नर्सिंग होम में होने वाली डिलीवरी के सापेक्ष 1400-1400 के चेक समरेर से जारी किए गए।
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ये था मामला
समरेर पीएचसी पर प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. गौतम ने सात दिसंबर 11 को जेएसवाई के 38 फर्जी चेक पकड़े थे। इसके बाद कराई गई जांच में फर्जी चेकों की संख्या बढ़ती गई। घोटाला दबाने के लिए चिकित्सक की समरेर केंद्र में ही तैनाती दिखाकर बरेली, बहराइच, सोनभद्र स्थानांतरण कर दिए गए।
आरटीआई में हुआ खुलासा
सूचना के अधिकार के तहत घोटाले पर कार्रवाई के बावत पूछे जाने पर जवाब में तत्कालीन एडी हेल्थ आरआर त्यागी का पत्र भेजा गया। उसमें एडी ने लिखा है कि नौ दिसंबर 2011 को व्यक्तिगत रूप से प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से संक्षेप में समरेर में घोटाले का जिक्र किया था। उसी दिन मंडलीय अपर निदेशकों की बैठक में डीजी हेल्थ से इस मामले के समाधान के बारे में जिज्ञासा प्रकट की थी। 23 मार्च को फोन पर प्रमुख सचिव से समरेर कांड का जिक्र करते हुए समस्या के हल की अपेक्षा की थी।
इस मामले की जांच हो चुकी है, मैंने फाइल नहीं देखी है। वैसे पूर्व एडी ने शासन को पत्र लिखा था।- रमेश श्रीवास्तव, एडी हेल्थ बरेली
भराव की मिट्टी में खेल, कैग ने पकड़ी थी गड़बड़ी
सीएचसी परिसर में डलवाई गई कम मिट्टी, दिखाई ज्यादा
बदायूं। सहसवान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मिट्टी डलवाने में ही हेराफेरी कर दी गई। परिसर में कम मिट्टी डलवाई गई जबकि हिसाब में 80 ट्रॉली दर्शाई गई हैं। जब केंद्रीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) टीम ने इसकी जांच की तो मामला पकड़ा गया। रकम जारी करने पर रोक भी लगाई थी, लेकिन विभाग ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
सूत्र बताते हैं कि अगस्त में बकाया रकम भी विभाग ने केंद्र को जारी कर दी। सूत्रों के अनुसार इस पर आठ लाख की रकम खर्च दिखाई गई। कैग टीम मार्च में पहुंची तो पाया कि परिसर छोटा था और मिट्टी अधिक डाली जाना दर्शाया गया है। विभाग के अफसरों को आदेश दिए थे कि ये रकम जारी नहीं की जाए, लेकिन अगस्त में रकम जारी कर दी गई। सीएचसी प्रभारी ने भी इस मामले में अनभिज्ञता जताई है।
मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है, यदि ऐसा हुआ है तो इस प्रकरण को दिखवाया जाएगा। - डा. आरपी सिंह, सीएमओ
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तत्कालीन एडी हेल्थ ने प्रमुख सचिव, डीजी हेल्थ को पत्र लिख बताया था जान को खतरा
सुशील कुमार
बदायूं। मायावती के शासनकाल में इस जिले में उजागर हुए घोटाले पर कार्रवाई आज भी अधर में है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत जिले में 168 फर्जी केस पकड़े गए थे। तत्कालीन एडी हेल्थ ने पत्र के माध्यम से प्रमुख सचिव, डीजी हेल्थ तक को इसकी जानकारी दी लेकिन किसी भी घोटालेबाज के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। एडी ने घोटालेबाजों के नाम खोलने पर खुद पर हमले की आशंका भी जताई थी।
तत्कालीन एडी हेल्थ ने प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में उल्लेख किया है कि दो दिसंबर 11 तक समरेर पीएचसी पर डा. वीरेश कुमार प्रभारी थे। इनके कार्यकाल में इस तिथि तक जननी सुरक्षा के कार्य में बड़े स्केल पर घोटाला हुआ है। इसके सुबूतों की फोटो स्टेट उनके दफ्तर में सुरक्षित है और मूल कॉपी स्वास्थ्य मंत्री को घोटाला उजागर करने वाले चिकित्सक डा. गौतम ने दिखाई है। सरकारी धन की लूट में कर्मचारियों के साथ अधिकारी भी शामिल रहे हैं। नाम अभी गोपनीय रखे जा रहे हैं, ताकि मुझे कोई शारीरिक क्षति न पहुंचे। बेईमानी करने के लिए जारी किए गए चेकों की संख्या 55 और संदेहपूर्ण चेकों की संख्या 160 से अधिक रही है। ऐसे व्यक्तियों के नाम से भी चेक जारी करके कैश करवाए गए हैं जो कहीं हैं ही नहीं।
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एक व्यक्ति जो मर चुका है, किसी अन्य से दस्तखत कराकर उसे जिंदा भी दिखा दिया गया है। जिस व्यक्ति अमनपाल के दस्तखत कराए गए हैं वह खुर्दी गांव का है। समरेर कांड की जांच से संबंधित अधिकारी उसे दिवंगत लिख रहे हैं। दिवंगत व्यक्ति हस्ताक्षर कैसे कर सकता है? यहां तक हुआ है कि पंजाब और प्राइवेट नर्सिंग होम में होने वाली डिलीवरी के सापेक्ष 1400-1400 के चेक समरेर से जारी किए गए।
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ये था मामला
समरेर पीएचसी पर प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. गौतम ने सात दिसंबर 11 को जेएसवाई के 38 फर्जी चेक पकड़े थे। इसके बाद कराई गई जांच में फर्जी चेकों की संख्या बढ़ती गई। घोटाला दबाने के लिए चिकित्सक की समरेर केंद्र में ही तैनाती दिखाकर बरेली, बहराइच, सोनभद्र स्थानांतरण कर दिए गए।
आरटीआई में हुआ खुलासा
सूचना के अधिकार के तहत घोटाले पर कार्रवाई के बावत पूछे जाने पर जवाब में तत्कालीन एडी हेल्थ आरआर त्यागी का पत्र भेजा गया। उसमें एडी ने लिखा है कि नौ दिसंबर 2011 को व्यक्तिगत रूप से प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से संक्षेप में समरेर में घोटाले का जिक्र किया था। उसी दिन मंडलीय अपर निदेशकों की बैठक में डीजी हेल्थ से इस मामले के समाधान के बारे में जिज्ञासा प्रकट की थी। 23 मार्च को फोन पर प्रमुख सचिव से समरेर कांड का जिक्र करते हुए समस्या के हल की अपेक्षा की थी।
इस मामले की जांच हो चुकी है, मैंने फाइल नहीं देखी है। वैसे पूर्व एडी ने शासन को पत्र लिखा था।- रमेश श्रीवास्तव, एडी हेल्थ बरेली
भराव की मिट्टी में खेल, कैग ने पकड़ी थी गड़बड़ी
सीएचसी परिसर में डलवाई गई कम मिट्टी, दिखाई ज्यादा
बदायूं। सहसवान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मिट्टी डलवाने में ही हेराफेरी कर दी गई। परिसर में कम मिट्टी डलवाई गई जबकि हिसाब में 80 ट्रॉली दर्शाई गई हैं। जब केंद्रीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) टीम ने इसकी जांच की तो मामला पकड़ा गया। रकम जारी करने पर रोक भी लगाई थी, लेकिन विभाग ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
सूत्र बताते हैं कि अगस्त में बकाया रकम भी विभाग ने केंद्र को जारी कर दी। सूत्रों के अनुसार इस पर आठ लाख की रकम खर्च दिखाई गई। कैग टीम मार्च में पहुंची तो पाया कि परिसर छोटा था और मिट्टी अधिक डाली जाना दर्शाया गया है। विभाग के अफसरों को आदेश दिए थे कि ये रकम जारी नहीं की जाए, लेकिन अगस्त में रकम जारी कर दी गई। सीएचसी प्रभारी ने भी इस मामले में अनभिज्ञता जताई है।
मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है, यदि ऐसा हुआ है तो इस प्रकरण को दिखवाया जाएगा। - डा. आरपी सिंह, सीएमओ