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मिट्टी के दीए जलाने से आता है सौभाग्य
Badaun
Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
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महंगाई ने फीकी कर दी दीयों की चमक, मोमबत्ती-झालरों की ओर बढ़ा रुझान
बदायूं। दीपावली के मौके पर दीयों का अलग ही महत्व है। मान्यता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से शौर्य और पराक्रम में वृद्धि होती है और परिवार में सुख समृद्धि आती है। लेकिन महंगाई के चलते अब दीयाें का चलन कम हो गया है। तेल की महंगाई ने लोगों का रुझान मोमबत्ती और बिजली की झालरों की ओर कर दिया है।
चौदह साल के वनवास केबाद जब लंका पति रावण को मारकर प्रभु राम, सीता और लक्ष्मण केसाथ अयोध्या पहुंचे तो अयोध्यावासियों ने दीपक जलाकर अपनी खुशी प्रकट की थी। मिट्टी का दीपक जलाने के पीछे कई मत हैं। मान्यता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। पंडित गिरीश बताते हैं कि मिट्टी को मंगल ग्रह का प्रतीक माना जाता है मंगल साहस, पराक्रम मेें वृद्घि करता है और तेल को शनि का प्रतीक माना जाता है। शनि को भाग्य का देवता कहा जाता है। मिट्टी का दीपक जलाने से मंगल और शनि की कृपा आती है। इसके अलावा दीपक जलाने का महत्व उसकी रोशनी केकारण भी है। रोशनी को सुख, समृद्धि, स्फूर्ति का प्रतीक माना जाता है। जबकि अंधकार को दुख, आलस्य, निर्धनता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भी दीपक जलाने का बहुत अधिक महत्व है।
महंगाई ने बदल दिए मान्यताओं का मतलब
महंगाई के चलते दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाना रस्म बन कर रह गया गया है। एक समय था जब घरों की मुंडेर पर दीपावली के दिन शाम होते ही दीयों की कतारें जगमगाने लगती थीं। लेकिन महंगाई के चलते अब दीयों की जगह मोमबत्ती और बिजली की झालरों ने ले ली है। बाजार में मिलने वाली 25 रुपये की चाइनीज झालर से पूरा घर रोशन हो जाता है। जबकि 25 रुपये में महज 250 ग्राम तेल ही आएगा जिससे बमुश्किल पचास दीये ही रोशन हो सकेंगे।
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बदायूं। दीपावली के मौके पर दीयों का अलग ही महत्व है। मान्यता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से शौर्य और पराक्रम में वृद्धि होती है और परिवार में सुख समृद्धि आती है। लेकिन महंगाई के चलते अब दीयाें का चलन कम हो गया है। तेल की महंगाई ने लोगों का रुझान मोमबत्ती और बिजली की झालरों की ओर कर दिया है।
चौदह साल के वनवास केबाद जब लंका पति रावण को मारकर प्रभु राम, सीता और लक्ष्मण केसाथ अयोध्या पहुंचे तो अयोध्यावासियों ने दीपक जलाकर अपनी खुशी प्रकट की थी। मिट्टी का दीपक जलाने के पीछे कई मत हैं। मान्यता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। पंडित गिरीश बताते हैं कि मिट्टी को मंगल ग्रह का प्रतीक माना जाता है मंगल साहस, पराक्रम मेें वृद्घि करता है और तेल को शनि का प्रतीक माना जाता है। शनि को भाग्य का देवता कहा जाता है। मिट्टी का दीपक जलाने से मंगल और शनि की कृपा आती है। इसके अलावा दीपक जलाने का महत्व उसकी रोशनी केकारण भी है। रोशनी को सुख, समृद्धि, स्फूर्ति का प्रतीक माना जाता है। जबकि अंधकार को दुख, आलस्य, निर्धनता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भी दीपक जलाने का बहुत अधिक महत्व है।
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महंगाई ने बदल दिए मान्यताओं का मतलब
महंगाई के चलते दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाना रस्म बन कर रह गया गया है। एक समय था जब घरों की मुंडेर पर दीपावली के दिन शाम होते ही दीयों की कतारें जगमगाने लगती थीं। लेकिन महंगाई के चलते अब दीयों की जगह मोमबत्ती और बिजली की झालरों ने ले ली है। बाजार में मिलने वाली 25 रुपये की चाइनीज झालर से पूरा घर रोशन हो जाता है। जबकि 25 रुपये में महज 250 ग्राम तेल ही आएगा जिससे बमुश्किल पचास दीये ही रोशन हो सकेंगे।
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