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बारात रोकने को लेकर 14 पर रिपोर्ट
Badaun
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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सहसवान(बदायूं)। दलित की बेटी की बारात गांव में घूमने से रोकने के मामले में पुलिस ने 14 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है। लड़की की मां की तहरीर पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
बता दें, 28 अप्रैल को थाना क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर में दलित महिला रामकली की पुत्री सुनीता की चंदौसी के गांव मई से बारात आई थी। जब वर पक्ष ने बारात को गांव में घुमाने की तैयारी कर रही थे तो गांव वालों ने इसे नई परंपरा बताते हुए गांव में बारात को घूमने से रोक दिया। बारात गांव मे बिना घूमे ही रातभर प्राइमरी स्कूल में पड़ी रही। अगली सुबह जानकारी होने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कन्या पक्ष को समझा बुझाकर शादी की सभी रस्में अपनी निगरानी में कराईं और अपने सामने ही बारात को दुल्हन के साथ विदा करा दिया। इस मामले की गूंज दिल्ली तक पहुंची और अनुसूचित जाति आयोग जांच करने मौके पर पहुंचा तथा जिले के तमाम संगठनों ने बारात चढ़ने से रोकने का काफी विरोध किया। मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में पहुंचने के बाद पुलिस हरकत में आयी और दुल्हन की मां रामकली की तहरीर पर गांव के साहब सिंह, नेकसू, रिंकू, विशेषपाल, सुनील, चन्द्रपाल, भगवान सिंह, पूसे, मुख्तयार, सूरजपाल, संतोष, बॉबी सहित 14 लोगों के खिलाफ दलित उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज करने कार्रवाई की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से गांव के लोगों के बीच हड़कंप मच गया है।
सभी दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग
बदायूं। उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ ने पुलिस महानिरीक्षक को पत्र भेजकर सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि यह कार्रवाई अगर तत्काल न की गई तो संगठन आंदोलन करेगा।
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पत्र में संघ का कहना है कि गांव के लोगों के एक राय होकर एक वाल्मीकि समाज के परिवार की बारात को गांव में न घूमने देना एक घृणित कार्य है। ज्ञापन पर प्रांतीय उपाध्यक्ष कालीचरन वाल्मीकि व सचिव सुभाष मुखर्जी, जिलाध्यक्ष कल्लूराम, जिला प्रभारी मुकेश वाल्मीकि, जिला महासचिव रमशे डी लाल वाल्मीकि सहित कई लोगों के हस्ताक्षर हैं।
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बता दें, 28 अप्रैल को थाना क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर में दलित महिला रामकली की पुत्री सुनीता की चंदौसी के गांव मई से बारात आई थी। जब वर पक्ष ने बारात को गांव में घुमाने की तैयारी कर रही थे तो गांव वालों ने इसे नई परंपरा बताते हुए गांव में बारात को घूमने से रोक दिया। बारात गांव मे बिना घूमे ही रातभर प्राइमरी स्कूल में पड़ी रही। अगली सुबह जानकारी होने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कन्या पक्ष को समझा बुझाकर शादी की सभी रस्में अपनी निगरानी में कराईं और अपने सामने ही बारात को दुल्हन के साथ विदा करा दिया। इस मामले की गूंज दिल्ली तक पहुंची और अनुसूचित जाति आयोग जांच करने मौके पर पहुंचा तथा जिले के तमाम संगठनों ने बारात चढ़ने से रोकने का काफी विरोध किया। मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में पहुंचने के बाद पुलिस हरकत में आयी और दुल्हन की मां रामकली की तहरीर पर गांव के साहब सिंह, नेकसू, रिंकू, विशेषपाल, सुनील, चन्द्रपाल, भगवान सिंह, पूसे, मुख्तयार, सूरजपाल, संतोष, बॉबी सहित 14 लोगों के खिलाफ दलित उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज करने कार्रवाई की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से गांव के लोगों के बीच हड़कंप मच गया है।
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सभी दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग
बदायूं। उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ ने पुलिस महानिरीक्षक को पत्र भेजकर सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि यह कार्रवाई अगर तत्काल न की गई तो संगठन आंदोलन करेगा।
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पत्र में संघ का कहना है कि गांव के लोगों के एक राय होकर एक वाल्मीकि समाज के परिवार की बारात को गांव में न घूमने देना एक घृणित कार्य है। ज्ञापन पर प्रांतीय उपाध्यक्ष कालीचरन वाल्मीकि व सचिव सुभाष मुखर्जी, जिलाध्यक्ष कल्लूराम, जिला प्रभारी मुकेश वाल्मीकि, जिला महासचिव रमशे डी लाल वाल्मीकि सहित कई लोगों के हस्ताक्षर हैं।