{"_id":"1-40493","slug":"Badaun-40493-119","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले के 15 हजार बच्चों का नहीं हुआ टीकाकरण"}
जिले के 15 हजार बच्चों का नहीं हुआ टीकाकरण
Badaun
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। जिले में नियमित टीकाकरण अभियान फ्लॉप हो गया है। यही कारण है कि 15 हजार बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ। चिकित्सकों के अनुसार इन वंचित बच्चों में काली खांसी, खसरा, गलघोंटू, टिटनेस, टीबी रोग के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग को 1 लाख 845 बच्चों को टीकाकरण करने का लक्ष्य मिला था, लेकिन 86,870 बच्चों का ही टीकाकरण किया गया। सूत्र बताते हैं कि यह आंकड़े भी कागजी हैं। केवल अफसरों ने 86 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर अपनी गर्दनें बचाई हैं।
इन रोगों के बचाव के लिए लगता है टीका
नियमित टीकाकरण 1980 से चला आ रहा है। यह टीका पोलियो, काली खांसी, टिटनेस, टीबी, खसरा रोग के लिए लगता है। अब इसमें हेपेटाइटिस बी का भी टीका शामिल हो गया है। यह टीके लगने से भविष्य में इन रोगों की संभावना नहीं रहती है। पोलियो की जीरो डोज होती है। बच्चे के जन्म के 24 घंटे के अंदर हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया जाता है। टीबी के लिए जन्म के समय दवा दी जा सकती है। बाकी बीमारियों के लिए बच्चे को छह सप्ताह के बाद टीके लगाए जाते हैं। खसरा का टीका नौ से 12 माह के अंदर लगता है।
यह हैं आंकड़े
वर्ष 2011 में 1,00,845 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य मिला था। महकमे के कागजों में 86,870 बच्चों को टीके लगाए गए। इसमें काली खांसी, टिटनेस, गलघोंटू के 86113 बच्चों को टीके लगे। वहीं टीबी के 92,542 बच्चों को टीके लगाए गए। इस तरह टीबी की अपेक्षा काली खांसी के 6,429 बच्चों को कम टीके लगे। हेपेटाइटिस बी के टीके इसी साल से लगाए जा रहे हैं।
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अधिकांश बच्चों का टीकाकरण हो गया है,जो बच्चे इससे वंचित हैं उनके अभिभावक बाहर चले जाते हैं। कभी-कभार आने पर पता नहीं लग पाता। फिर भी 86 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। चालू सत्र में लक्ष्य नहीं मिला है। -डॉ. आरएन हरित, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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इन रोगों के बचाव के लिए लगता है टीका
नियमित टीकाकरण 1980 से चला आ रहा है। यह टीका पोलियो, काली खांसी, टिटनेस, टीबी, खसरा रोग के लिए लगता है। अब इसमें हेपेटाइटिस बी का भी टीका शामिल हो गया है। यह टीके लगने से भविष्य में इन रोगों की संभावना नहीं रहती है। पोलियो की जीरो डोज होती है। बच्चे के जन्म के 24 घंटे के अंदर हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया जाता है। टीबी के लिए जन्म के समय दवा दी जा सकती है। बाकी बीमारियों के लिए बच्चे को छह सप्ताह के बाद टीके लगाए जाते हैं। खसरा का टीका नौ से 12 माह के अंदर लगता है।
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यह हैं आंकड़े
वर्ष 2011 में 1,00,845 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य मिला था। महकमे के कागजों में 86,870 बच्चों को टीके लगाए गए। इसमें काली खांसी, टिटनेस, गलघोंटू के 86113 बच्चों को टीके लगे। वहीं टीबी के 92,542 बच्चों को टीके लगाए गए। इस तरह टीबी की अपेक्षा काली खांसी के 6,429 बच्चों को कम टीके लगे। हेपेटाइटिस बी के टीके इसी साल से लगाए जा रहे हैं।
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अधिकांश बच्चों का टीकाकरण हो गया है,जो बच्चे इससे वंचित हैं उनके अभिभावक बाहर चले जाते हैं। कभी-कभार आने पर पता नहीं लग पाता। फिर भी 86 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। चालू सत्र में लक्ष्य नहीं मिला है। -डॉ. आरएन हरित, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी