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वेतन मुद्दे पर बैंक कर्मचारियों का प्रदर्शन
Badaun
Updated Thu, 04 Dec 2014 05:30 AM IST
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बदायूं। यूनाइटेड फोेरम ऑफ बैंक्स यूनियन (यूएफबीयू) के आह्वान पर बुधवार को लंबित वेतन समझौते की मांग को लेकर जिले के समस्त सरकारी बैंकों कर्मचारी/अधिकारियों ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। पीएनबी की मुख्य शाखा पर एकत्र होकर धरना दिया गया।
जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी आज तक वेतन समझौता लंबित पड़ा है। जबकि आईबीए/सरकार से अनेक बार इस संदर्भ में वार्ता भी हो चुकी है उनकी तरफ से 11 प्रतिशत वृद्धि की पेशकश ही गई। जबकि यूनाइटेड फोरम लचीला रूख अपनाते हुए 23 प्रतिशत की मांग पर अड़ा है। कहते हैं, इस पर हल न निकलने के बाद बैंक कर्मचारी पिस रहा है और इस महंगाई के दौर में कम वेतन पर काम करने को मजबूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया कर्मचारी/अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहने को मजबूर होंगे। ऋषिराम गुप्ता ने कहा कि सरकार बैंकिंग सुधार के नाम पर कर्मचारियों का अहित कर रही है। बैंकिंग कानून में संशोधन किया गया है। बैंकिंग उद्योगों की समस्याओं की अनदेखी की गई है। सरकार की गलत नीतियों के कारण बैंकों का एनपीए बढ़ गया है। शकील अहमद ने कहा कि बैंकों में वेतन बहुत कम है। लिहाजा युवाओं में बैंकों के प्रति आकर्षण कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि काम की अधिकता हो गई है। बावजूद इसके वेतन में वृद्धि नहीं की जा रही है। प्रदर्शन के दौरान अशोक बाबू गुप्ता, संजय मलिक ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान सुनील बाबू रस्तोगी, रामपाल, राजेश कुमार वर्मा, संजय मलिक, राकेश सिंह, सुरेश अरोड़ा, राहुल, संजीव शर्मा, अजय गुप्ता, पीके गुप्ता, छोटेलाल, केएन गुप्ता, श्यामपाल सिंह, अशोक बाबू, आर्यजीत प्रसाद, पंकज कुमार यादव, प्रेमबाबू, अंकित वर्मा आदि मौजूद रहे।
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जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी आज तक वेतन समझौता लंबित पड़ा है। जबकि आईबीए/सरकार से अनेक बार इस संदर्भ में वार्ता भी हो चुकी है उनकी तरफ से 11 प्रतिशत वृद्धि की पेशकश ही गई। जबकि यूनाइटेड फोरम लचीला रूख अपनाते हुए 23 प्रतिशत की मांग पर अड़ा है। कहते हैं, इस पर हल न निकलने के बाद बैंक कर्मचारी पिस रहा है और इस महंगाई के दौर में कम वेतन पर काम करने को मजबूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया कर्मचारी/अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहने को मजबूर होंगे। ऋषिराम गुप्ता ने कहा कि सरकार बैंकिंग सुधार के नाम पर कर्मचारियों का अहित कर रही है। बैंकिंग कानून में संशोधन किया गया है। बैंकिंग उद्योगों की समस्याओं की अनदेखी की गई है। सरकार की गलत नीतियों के कारण बैंकों का एनपीए बढ़ गया है। शकील अहमद ने कहा कि बैंकों में वेतन बहुत कम है। लिहाजा युवाओं में बैंकों के प्रति आकर्षण कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि काम की अधिकता हो गई है। बावजूद इसके वेतन में वृद्धि नहीं की जा रही है। प्रदर्शन के दौरान अशोक बाबू गुप्ता, संजय मलिक ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान सुनील बाबू रस्तोगी, रामपाल, राजेश कुमार वर्मा, संजय मलिक, राकेश सिंह, सुरेश अरोड़ा, राहुल, संजीव शर्मा, अजय गुप्ता, पीके गुप्ता, छोटेलाल, केएन गुप्ता, श्यामपाल सिंह, अशोक बाबू, आर्यजीत प्रसाद, पंकज कुमार यादव, प्रेमबाबू, अंकित वर्मा आदि मौजूद रहे।
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