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जिंबाब्वे ने आरटीजीएस डॉलर को घोषित किया वैध मुद्रा
Tue, 25 Jun 2019 04:55 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 25 Jun 2019 04:55 AM IST
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zimbabwe currency
- फोटो : social media
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अफ्रीकी देश जिंबाब्वे ने सोमवार को अपनी अंतरिम मुद्रा को देश की एकमात्र वैध मुद्रा घोषित कर दिया। जिंबाब्वे ने विदेशी मुद्रा की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी के बाद यह कदम उठाया। जिंबाब्वे ने फरवरी में आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) डॉलर को अंतरिम मुद्रा घोषित किया था। साल के अंत तक नई मुद्रा पेश करने की दिशा में यह पहला कदम था। यह राष्ट्रपति इमर्सन मनांगाग्वा ने मुद्रास्फीति और व्यापक कमी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने की योजना का हिस्सा था।
सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि जिंबाब्वे डॉलर के साथ ही ब्रिटिश पाउंड, अमेरिकी डॉलर, दक्षिण अफ्रीकी रैंड, बोत्सवाना का पूला या अन्य विदेशी मुद्रा देश में वैध मुद्रा नहीं होगी। आरटीजीएस डॉलर में कंपनियों और आम लोगों को पूरी तरह से भरोसा नहीं है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अंतरिम मुद्रा के साथ 2008 वाले हालात एक बार फिर से पैदा हो सकते हैं।
कई नागरिकों की शिकायत है कि ज्यादातर सामान और सेवाओं का भुगतान अब भी दूसरी मुद्राओं में हो रहा है, जबकि 80 फीसदी से ज्यादा नागरिक आरटीजीएस डॉलर में कमाते हैं। लेकिन ईंट से लेकर कार पेंट, जरूरी सामानों के दाम अमेरिकी डॉलर में ही तय हो रहे हैं। इसकी वजह से देश में महंगाई दशक के उच्चतम स्तर 97.86 फीसदी पर पहुंच गई है। लोगों का वेतन और बचत खत्म हो चुकी है। लोगों को डर सता रहा है कि 2008 वाले हालात फिर से न पैदा हो जाएं, जब यह दर 500 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।
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सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि जिंबाब्वे डॉलर के साथ ही ब्रिटिश पाउंड, अमेरिकी डॉलर, दक्षिण अफ्रीकी रैंड, बोत्सवाना का पूला या अन्य विदेशी मुद्रा देश में वैध मुद्रा नहीं होगी। आरटीजीएस डॉलर में कंपनियों और आम लोगों को पूरी तरह से भरोसा नहीं है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अंतरिम मुद्रा के साथ 2008 वाले हालात एक बार फिर से पैदा हो सकते हैं।
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कई नागरिकों की शिकायत है कि ज्यादातर सामान और सेवाओं का भुगतान अब भी दूसरी मुद्राओं में हो रहा है, जबकि 80 फीसदी से ज्यादा नागरिक आरटीजीएस डॉलर में कमाते हैं। लेकिन ईंट से लेकर कार पेंट, जरूरी सामानों के दाम अमेरिकी डॉलर में ही तय हो रहे हैं। इसकी वजह से देश में महंगाई दशक के उच्चतम स्तर 97.86 फीसदी पर पहुंच गई है। लोगों का वेतन और बचत खत्म हो चुकी है। लोगों को डर सता रहा है कि 2008 वाले हालात फिर से न पैदा हो जाएं, जब यह दर 500 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।
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