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World Press Freedom Index: बांग्लादेश को प्रेस की आजादी का पाठ क्यों पढ़ाया अमेरिका ने?

Thu, 04 May 2023 05:00 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 04 May 2023 05:00 PM IST
सार

ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास की पहल पर बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजनयिकों को आमंत्रित किया गया। राजनयिकों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र प्रेस की भूमिका पर जोर दिया...

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World Press Freedom Index: Why United states taught Bangladesh a lesson on press freedom
World press freedom index in Bangladesh: Charge d'affaires (CDA) at the US Embassy in Dhaka Helen La - फोटो : Agency

विस्तार

बांग्लादेश स्थित अमेरिकी दूतावास ने वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे के मौके पर प्रेस की स्वतंत्रता पर चर्चा आयोजित कर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। पिछले कुछ महीनों से बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी अवामी लीग को शिकायत रही है कि अमेरिका बांग्लादेश के अंदरूनी मामलों में दखल दे रहा है। गुजरे समय में अवामी लीग सरकार पर प्रेस की आजादी का दमन करने के आरोप लगते रहे हैं।

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ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास की पहल पर बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजनयिकों को आमंत्रित किया गया। राजनयिकों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र प्रेस की भूमिका पर जोर दिया। इस चर्चा की आयोजक अमेरिकी दूतावास की प्रभारी हेलेन लाफेव ने कहा कि पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। मीडिया फ्रीडम की रक्षा करने का लाभ समाज को मिलता है। प्रेस की आजादी किसी भी लोकतंत्र के लिए अति महत्त्वपूर्ण है।

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खासकर हेलेन लाफेव की इस टिप्पणी को बांग्लादेश के संदर्भ में देखा गया है- ‘पत्रकारिता अपराध नहीं है। मैं दोहरा रही हूं, पत्रकारिता अपराध नहीं है। पत्रकारों को अपना काम करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए, न ही उन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाने चाहिए। सिर्फ कागज पर पत्रकारों की रक्षा का संवैधानिक प्रावधान या कानून का होना काफी नहीं है।’

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इस चर्चा का शीर्षक रखा गया था- ‘अधिकारों के भविष्य को आकार देनाः अन्य मानव अधिकारों के प्रेरक के रूप में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।’ पिछले एक साल के दौरान अमेरिका ने कई बार बांग्लादेश सरकार पर मानव अधिकारों के हनन के आरोप लगाया है। एक बार अमेरिकी प्रभारी राजदूत विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक लापता नेता के घर चले गए थे। उस घटना को लेकर तब अवामी लीग ने कड़ा एतराज जताया था।

अमेरिकी दूतावास की पहल पर हुई चर्चा में विभिन्न देशों के राजदूतों ने अपने विचार व्यक्त किए। हेलेन लाफेव ने कहा- ‘हमें मिल कर मीडिया फ्रीडम के सिद्धांतों की रक्षा करनी चाहिए और प्रकाश को चमकने देना चाहिए। आलोचक आवाजों को चुप कराने और मीडिया का दायरा सीमित करने के प्रयासों का मुकाबला किया जाना चाहिए। हम सबको अधिक न्यायपूर्ण, समतापूर्ण और समृद्ध विश्व के निर्माण के लिए मिल कर काम करना चाहिए।’

ढाका स्थित कनाडा की उच्चायुक्त लिली निकोल्स ने ध्यान दिलाया कि उन देशों की संख्या घटती जा रही है, जहां पत्रकारों के लिए काम करना सुरक्षित माना जाता हो। उन्होंने वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे के मौके पर पेरिस स्थित संस्था रिपोर्ट्स विदाउट बॉर्डर्स की तरफ से जारी रिपोर्ट का जिक्र किया और कहा कि 180 देशों में से 73 में पत्रकारिता पर या तो रोक है या पत्रकारों के काम में रुकावट डाली जाती है।

चर्चा में बांग्लादेश के कुछ पत्रकारों को भी बुलाया गया था। इसके आरंभ में कुछ राजनयिकों की तरफ से भेजे गए वीडियो संदेश दिखाए गए। चर्चा के दौरान एक लेख भी वितरित किया गया, जिसमें मानव अधिकारों के हनन को बेनकाब करने में पत्रकारों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक किसी देश में किसी दूसरे देश के दूतावास की तरफ से ऐसे कार्यक्रम का आयोजन एक असामान्य घटना है। अमेरिकी दूतावास की इस पहल पर यहां सियासी हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

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