शांति के जरिए ही आपदा, आतंकवाद और गरीबी जैसी चुनौतियों से निपट सकता है विश्व : सू की
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म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की ने शनिवार को कहा कि आज विश्व पारंपरिक एवं अपारंपरिक खतरों, विभिन्न प्रकार की आपदाओं, आतंकवाद, गरीबी, अन्याय जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है तथा ‘शांति की संस्कृति’ से ही सौहार्द्र का माहौल कायम किया जा सकता है ।
यूनिवर्सल पीस फेडेरेशन की ओर से आयोजित एशिया प्रशांत शिखर सम्मेलन, नेपाल 2018 को संबोधित करते हुए आंग सान सू की ने विश्व के समक्ष गंभीर चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में तेजी से प्रौद्योगिकी विकास हो रहा है और एक दूसरे के साथ संपर्क एवं निर्भरता भी बढ़ रही है ।
उन्होंने कहा कि संपर्क और निर्भरता बढ़ने से कुछ सहूलियतों के साथ कुछ समस्याएं भी खड़ी हो गई हैं। आज के दौर में कोई भी एकाकी रूप से नहीं रह सकता है। हमें द्विपक्षीय और बहुस्तरीय संपर्क बढ़ाना होगा। दुनिया में उत्पन्न वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए सौहार्द्र का माहौल कायम करने के लिये ‘शांति की संस्कृति’ को विकसित करना जरूरी है।
शांति की उम्मीद केवल शांति की संस्कृति से
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सू की ने कहा कि दुनिया में विविधतापूर्ण समाज को एकसूत्र में बांधकर आगे ले जाने के लिए टिकाऊ विकास जरूरी है। यह समतामूलक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में मानव तस्करी एवं वर्ग संघर्ष बढ़ रहे हैं जिसके कारण घृणा और भय का माहौल पनप रहा है। ऐसे में शांति की उम्मीद केवल शांति की संस्कृति से ही कायम की जा सकती है।
सू की ने कहा, ‘शांति न केवल हमारे समय की सांस्कृतिक जरूरत है बल्कि यह सभी समय के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि शांति ही विकास की आधारशिला है।’ उन्होंने कहा कि म्यांमार शांति एवं प्रगति के पथ पर ऐसी ही चुनौतियों से जूझ रहा है और समान अवसर पर आधारित विचार के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।
आव्रजन नीति खड़ी कर रही समस्या : मारिया लियोनोर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए फिलिपींस की उपराष्ट्रपति मारिया लियोनोर जेरोन रोबरेडो ने कहा कि आज दुनिया में तेजी से बदलाव आ रहा है और बदलाव के इस दौर में अनेक क्षेत्रों में संरक्षणवाद, राष्ट्रवाद, हिंसा, भेदभाव की स्थिति गंभीर हो रही है।
उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में आव्रजन नीति समस्या खड़ी कर रही है। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज के कारण भी परेशानी आ रही है। ऐसे में इन चुनौतियों से निपटने में सामूहिक संकल्प ही हमारा महत्वपूर्ण हथियार हो सकता है।
रोबरेडो ने कहा, ‘हम आज ऐसे अभूतपूर्व समय में हैं जहां लोगों की आकांक्षाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। लोगों में असुरक्षा का भाव बढ़ रहा है। ऐसे में सत्ता प्रतिष्ठानों के प्रति उनका असंतोष भी बढ़ रहा है। अगर हम साथ मिलकर काम करना नहीं सीखेंगे तब हम इन चुनौतियों से पार नहीं पा सकेंगे।’
उन्होंने कहा कि आज स्थितियां ऐसी हैं जहां लोकतंत्र में लोगों को वोट डालने का अधिकार तो मिल गया है लेकिन उन्हें गरीब और अशिक्षित बनाए रखा जा रहा है। आज नागरिक स्वतंत्रता के साथ नागरिक न्याय जरूरी है।