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इंटरनेशनल कान्फ्रेंस: 'क्लाइमेट चेंज का हर क्षेत्र पर गहरा प्रभाव', WMO की उप प्रमुख एलेना मानेनकोवा बोलीं
Thu, 07 Dec 2023 06:39 PM IST
आदर्श शर्मा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, दुबई
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Thu, 07 Dec 2023 06:39 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ता के मौके पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन की उप प्रमुख ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का हर क्षेत्र में गहरा प्रभाव दिख रहा है। यहां पढ़ें...
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WMO की उप प्रमुख एलेना मानेनकोवा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ता के मौके पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन की उप प्रमुख के बयान में दुनियाभर के देशों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। डब्लूएमओ के उप प्रमुख ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से हर चीज प्रभावित हो रही है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की उप प्रमुख एलेना मानेनकोवा ने कहा कि दुनिया उस बिंदु के बहुत करीब है, जहां औसत तापमान वृद्धि पूर्व से 1.5 डिग्री सेल्सियम तक पहुंच जाएगी। वहीं एट्रिब्यूशन अध्ययन की विश्वसनीयता पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ये अध्ययन सुधार कर रहे हैं। वे कई घटनाओं को अच्छी विश्वसनीयता देते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन हर चीज पर अधिक प्रभाव डाल रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी घटना को जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार ठहराने की आवश्यकता एक अनावश्यक बोझ है।
मानेनकोवा ने कहा कि दुनिया शायद वायुमंडल में CO2 सांद्रता के बहुत करीब है, जो लंबी अवधि के लिए इसे 1.5 तक सीमित कर देगी। CO2 वायुमंडल में हजारों वर्षों से मौजूद है। प्राकृतिक चक्र इसे वायुमंडल से नहीं हटाता है। दुनिया को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि CO2 सांद्रता औसत तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए आवश्यक सीमा से अधिक न हो।
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साथ ही पृथ्वी की वैश्विक सतह का तापमान लगभग 1.15 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। औद्योगिक क्रांति की शुरुआत के बाद से जीवाश्म ईंधन के जलने के कारण वायुमंडल में उत्सजित CO2 का इससे गहरा संबंध है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, वर्ष 2023 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म है। डब्ल्यूएमओ के उप प्रमुख ने दीर्घकालिक जलवायु अनुमानों में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और कहा कि यह बहुत अधिक मददगार होगा, अगर हम मात्रात्मक भविष्यवाणियां देना शुरू करें।
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन की उप प्रमुख एलेना मानेनकोवा ने कहा कि दुनिया उस बिंदु के बहुत करीब है, जहां औसत तापमान वृद्धि पूर्व से 1.5 डिग्री सेल्सियम तक पहुंच जाएगी। वहीं एट्रिब्यूशन अध्ययन की विश्वसनीयता पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ये अध्ययन सुधार कर रहे हैं। वे कई घटनाओं को अच्छी विश्वसनीयता देते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन हर चीज पर अधिक प्रभाव डाल रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी घटना को जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार ठहराने की आवश्यकता एक अनावश्यक बोझ है।
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मानेनकोवा ने कहा कि दुनिया शायद वायुमंडल में CO2 सांद्रता के बहुत करीब है, जो लंबी अवधि के लिए इसे 1.5 तक सीमित कर देगी। CO2 वायुमंडल में हजारों वर्षों से मौजूद है। प्राकृतिक चक्र इसे वायुमंडल से नहीं हटाता है। दुनिया को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि CO2 सांद्रता औसत तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए आवश्यक सीमा से अधिक न हो।
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साथ ही पृथ्वी की वैश्विक सतह का तापमान लगभग 1.15 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। औद्योगिक क्रांति की शुरुआत के बाद से जीवाश्म ईंधन के जलने के कारण वायुमंडल में उत्सजित CO2 का इससे गहरा संबंध है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, वर्ष 2023 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म है। डब्ल्यूएमओ के उप प्रमुख ने दीर्घकालिक जलवायु अनुमानों में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और कहा कि यह बहुत अधिक मददगार होगा, अगर हम मात्रात्मक भविष्यवाणियां देना शुरू करें।