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पाकिस्तान: 'अगर निकाहनामे की शर्तें अस्पष्ट तो विवाद की स्थिति में पत्नी को मिलेगा लाभ', सुप्रीम कोर्ट का आदेश

Wed, 24 Apr 2024 06:02 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 24 Apr 2024 06:02 PM IST
सार

तलाक के बाद एक महिला ने निकाहनामे में निर्धारित शर्तों के तहत दहेज और अन्य वस्तुओं को वापस मांगा। इसके लिए महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

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Wife to get benefits in case of dispute if Nikahnama terms are ambiguous Pakistan Supreme Court
अदालत - फोटो : ANI

विस्तार

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिन एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि निकाहनामे में लिखे गए नियम-शर्तों में किसी भी तरह की अस्पष्टता के मामले में यदि कोई विवाद होता है तो महिला को लाभ दिया जाएगा। इसमें वे शर्तें भी शामिल होंगी, जिन पर निकाह के समय सहमति बनी होगी। फैसला जस्टिस अमीनुद्दीन खान और न्यायमूर्ति अतहर मिनुल्लाह की दो सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को एक दंपती के तलाक से संबंधित याचिका पर सुनाया। अपील पर 10 पन्नों का विस्तृत फैसला जारी किया गया।

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जानकारी के अनुसार, तलाक के बाद एक महिला ने निकाहनामे में निर्धारित शर्तों के तहत दहेज और अन्य वस्तुओं को वापस मांगा। इसके लिए महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। निकाहनामा एक इस्लामी निकाह अनुबंध होता है, जिस पर निहाह के समय दोनों पक्ष (शौहर-बेगम) हस्ताक्षर करते हैं। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा तो महिला को निकाहनामे के कॉलम नंबर 17 में दर्ज जमीन का एक हिस्सा दे दिया गया।
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हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपीलकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता ने कहा कि जमीन का मकसद यह था कि वहां एक घर बनाया जाएगा और जब तक निकाह टिकता है, महिला वहां रह सकती है। हालांकि, निकाहनामे में ऐसा कुछ साफ शब्दों में नहीं लिखा गया। मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने कानूनी सवाल यह था कि अगर निकाहनामे के नियमों और शर्तों में कोई अस्पष्टता थी, तो इसे कैसे हल किया जा सकता था?
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कोर्ट ने कहा कि यह एक पहले से तय कानून है कि अनुबंध में किसी भी तरह का संदेह पक्षों के इरादों से तय होती है। हालांकि, इस मामले में फैसले में कहा गया कि निकाहनामे के नियमों और शर्तों की व्याख्या करने से पहले यह भी विचार किया जाना चाहिए कि क्या दुल्हन को शादी के नियमों और शर्तों पर अपनी सहमति देने की पूरी स्वतंत्रता थी।


फैसले में कहा गया कि पुरुष-प्रधान समाज में नियम और शर्तें आम तौर पर दुल्हन की ओर से भी पुरुष ही तय करते हैं। इसलिए इसमें कहा गया है कि अगर किसी और ने दुल्हन से बात किए बिना निकाहनामे के कॉलम भर दिए, तो इसका इस्तेमाल दुल्हन के हित के खिलाफ नहीं किया जा सकता है। फैसले के मुताबिक, अगर निकाहनामे के नियम और शर्तों या किसी कॉलम में संदेह है, तो पत्नी को इसका लाभ मिलेगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने भी महिला को जमीन का एक टुकड़ा देने के हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और अपील खारिज कर दी।

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