{"_id":"65e1cc9b5aa62e15660c53af","slug":"why-is-the-name-of-the-pakistan-prime-minister-not-decided-even-after-weeks-of-elections-2024-03-01","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Pakistan: पाकिस्तान में चुनाव के हफ्तों बाद भी क्यों तय नहीं हुआ प्रधानमंत्री, यहां कैसे चुने जाते हैं पीएम?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Pakistan: पाकिस्तान में चुनाव के हफ्तों बाद भी क्यों तय नहीं हुआ प्रधानमंत्री, यहां कैसे चुने जाते हैं पीएम?
Fri, 01 Mar 2024 08:17 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 01 Mar 2024 08:17 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
पाकिस्तान
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
पाकिस्तान में अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका निर्धारण अभी तक नहीं हो सका है। देश में 8 फरवरी 2024 को आम चुनाव कराए गए थे। नतीजों में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं ने निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में सबसे ज्यादा सीटें जीतीं। इसके बाद नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन और बिलावल भुट्टो जरदारी की पीपीपी ने गठबंधन बनाने का फैसला किया।जानकारी है कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सचिवालय ने देश के नए प्रधानमंत्री के चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके अनुसार, 3 मार्च को पाकिस्तान को नया प्रधानमंत्री मिलेगा।
आइये जानते हैं कि पाकिस्तान में आम चुनाव कब हुए थे? इसके परिणाम कब आए? चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बनने में देरी क्यों? पीएम का चयन कब? यहां कैसे होता है प्रधानमंत्री का चुनाव?पीएम पद की रेस में कौन-कौन है?
पाकिस्तान में आम चुनाव कब हुए थे?
पाकिस्तान की जनता ने 8 फरवरी को आम चुनावों के लिए मतदान किया था। देश में 855 निर्वाचन क्षेत्रों में नेशनल असेंबली (NA) और प्रांतीय विधानसभाओं (PA) के लिए मतदान कराए गए थे। संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की कुल 266 में से 265 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। उम्मीदवार की मृत्यु के कारण एक सीट पर चुनाव स्थिगित कर दिया गया था। 8 फरवरी के चुनाव के लिए पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) ने 12 करोड़ से अधिक मतदाताओं का पंजीकरण किया था।
पाकिस्तान की जनता ने 8 फरवरी को आम चुनावों के लिए मतदान किया था। देश में 855 निर्वाचन क्षेत्रों में नेशनल असेंबली (NA) और प्रांतीय विधानसभाओं (PA) के लिए मतदान कराए गए थे। संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की कुल 266 में से 265 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। उम्मीदवार की मृत्यु के कारण एक सीट पर चुनाव स्थिगित कर दिया गया था। 8 फरवरी के चुनाव के लिए पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) ने 12 करोड़ से अधिक मतदाताओं का पंजीकरण किया था।
इसके परिणाम कब आए?
चुनाव के बाद ही वोटों की गिनती शुरू हो गई। इस बीच इमरान समर्थकों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग धांधली कर रहा है। इस वजह से आधिकारिक तौर पर सभी नतीजे घोषित होने में देरी हो रही है। हालांकि, 11 फरवरी को वोटों की गिनती पूरी कर ली गई।
इमरान की पार्टी पीटीआई के समर्थकों ने पाकिस्तान के चुनावों में सबसे अधिक सीटें जीतीं। पीटीआई से जुड़े स्वतंत्र उम्मीदवारों ने 265 में से 97 सीटों पर जीत दर्ज की। दूसरे नंबर पर नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) रही। पीएमएल-एन के 75 उम्मीदवार जीतकर आए। वहीं, 54 सीटों के साथ पीपीपी तीसरे नंबर पर रही। बाकी सीटें अन्य के खाते में गईं।
बता दें कि पाकिस्तान की संसद की कुल 336 सीटों की है। इसमें 266 सदस्यों को जनता प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए चुनती है। वहीं नेशनल असेंबली में 70 मनोनीत सदस्य होते हैं। देश की संसद की कुल 336 सीटों में से 169 सीटें जीतने वाली पार्टी सत्ता में आती है।
चुनाव के बाद ही वोटों की गिनती शुरू हो गई। इस बीच इमरान समर्थकों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग धांधली कर रहा है। इस वजह से आधिकारिक तौर पर सभी नतीजे घोषित होने में देरी हो रही है। हालांकि, 11 फरवरी को वोटों की गिनती पूरी कर ली गई।
इमरान की पार्टी पीटीआई के समर्थकों ने पाकिस्तान के चुनावों में सबसे अधिक सीटें जीतीं। पीटीआई से जुड़े स्वतंत्र उम्मीदवारों ने 265 में से 97 सीटों पर जीत दर्ज की। दूसरे नंबर पर नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) रही। पीएमएल-एन के 75 उम्मीदवार जीतकर आए। वहीं, 54 सीटों के साथ पीपीपी तीसरे नंबर पर रही। बाकी सीटें अन्य के खाते में गईं।
बता दें कि पाकिस्तान की संसद की कुल 336 सीटों की है। इसमें 266 सदस्यों को जनता प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए चुनती है। वहीं नेशनल असेंबली में 70 मनोनीत सदस्य होते हैं। देश की संसद की कुल 336 सीटों में से 169 सीटें जीतने वाली पार्टी सत्ता में आती है।
चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बनाने में देरी क्यों?
नतीजों के साथ ही सबसे बड़ा सवाल था कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा? पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ ने गठबंधन सरकार बनाने की इच्छा का संकेत दिया। आम चुनाव के बाद पीएमएल-एन ने शहबाज शरीफ को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में उम्मीदवार घोषित कर दिया। हालांकि, उनके बड़े भाई और तीन बार के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पीएम पद की रेस में आगे बताए जा रहे थे। इस बीच नवाज शरीफ की बेटी मरियम ने कहा कि उनके पिता पूर्ण बहुमत के बिना गठबंधन सरकार नहीं चलाना चाहते थे क्योंकि प्रधानमंत्री के रूप में उनके पिछले तीन कार्यकालों में उनके पास स्पष्ट बहुमत था। इस बीच मिली-जुली सरकार चलाने के लिए पीएमएल-एन को छह अन्य पार्टियों ने समर्थन देने का एलान किया। इनमें बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी पीपीपी भी शामिल है।
इस तरह से देश में तीन हफ्तों तक सियासी हलचल होती रही। पाकिस्तानी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को 8 फरवरी के आम चुनाव के 21 दिनों के भीतर नेशनल असेंबली का एक नया सत्र बुलाना था। नया सत्र बुलाने की समय सीमा 29 फरवरी तक थी जिस पर राष्ट्रपति ने इच्छा नहीं दिखाई। ऐसे में नेशनल असेंबली के अध्यक्ष राजा परवेज अशरफ ने 29 फरवरी को सत्र बुलाया। नई संसद के पहले सत्र में सबसे पहले सभी सांसद शपथ लेंगे।
नतीजों के साथ ही सबसे बड़ा सवाल था कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा? पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ ने गठबंधन सरकार बनाने की इच्छा का संकेत दिया। आम चुनाव के बाद पीएमएल-एन ने शहबाज शरीफ को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में उम्मीदवार घोषित कर दिया। हालांकि, उनके बड़े भाई और तीन बार के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पीएम पद की रेस में आगे बताए जा रहे थे। इस बीच नवाज शरीफ की बेटी मरियम ने कहा कि उनके पिता पूर्ण बहुमत के बिना गठबंधन सरकार नहीं चलाना चाहते थे क्योंकि प्रधानमंत्री के रूप में उनके पिछले तीन कार्यकालों में उनके पास स्पष्ट बहुमत था। इस बीच मिली-जुली सरकार चलाने के लिए पीएमएल-एन को छह अन्य पार्टियों ने समर्थन देने का एलान किया। इनमें बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी पीपीपी भी शामिल है।
इस तरह से देश में तीन हफ्तों तक सियासी हलचल होती रही। पाकिस्तानी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को 8 फरवरी के आम चुनाव के 21 दिनों के भीतर नेशनल असेंबली का एक नया सत्र बुलाना था। नया सत्र बुलाने की समय सीमा 29 फरवरी तक थी जिस पर राष्ट्रपति ने इच्छा नहीं दिखाई। ऐसे में नेशनल असेंबली के अध्यक्ष राजा परवेज अशरफ ने 29 फरवरी को सत्र बुलाया। नई संसद के पहले सत्र में सबसे पहले सभी सांसद शपथ लेंगे।
पीएम का चयन कब?
तीन हफ्तों के सियासी हलचल के बाद पाकिस्तान को 3 मार्च को पाकिस्तान के नाम की घोषणा होगी। हाल ही में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सचिवालय ने देश के नए प्रधानमंत्री के चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की थी।
जानकारी के मुताबिक, उम्मीदवार 2 मार्च को दोपहर दो बजे तक अपना नामांकन पत्र जमा कर सकते हैं। नामांकन पत्रों की जांच उसी दिन पूरी कर ली जाएगी। प्रधानमंत्री के चुनाव की प्रक्रिया नवनिर्वाचित सांसदों के जरिए होगी।
तीन हफ्तों के सियासी हलचल के बाद पाकिस्तान को 3 मार्च को पाकिस्तान के नाम की घोषणा होगी। हाल ही में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सचिवालय ने देश के नए प्रधानमंत्री के चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की थी।
जानकारी के मुताबिक, उम्मीदवार 2 मार्च को दोपहर दो बजे तक अपना नामांकन पत्र जमा कर सकते हैं। नामांकन पत्रों की जांच उसी दिन पूरी कर ली जाएगी। प्रधानमंत्री के चुनाव की प्रक्रिया नवनिर्वाचित सांसदों के जरिए होगी।
कैसे होता है पीएम का चुनाव?
पीएम को चुनने के लिए स्पीकर की देखरेख में मत विभाजन द्वारा मतदान कराया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि दो उम्मीदवार हैं, तो स्पीकर कहेगा कि 'जो कोई भी उम्मीदवार 'ए' के लिए वोट करना चाहता है, वह लॉबी 'ए' में जा सकता है' और 'जो कोई भी उम्मीदवार 'बी' के लिए वोट करना चाहता है, वह लॉबी 'बी' में जा सकता है।' अगर तीन उम्मीदवार हैं तो एक लॉबी 'सी' भी हो सकती है।
लॉबी के प्रवेश द्वार पर नेशनल असेंबली सचिवालय स्टाफ का एक सदस्य होगा जो प्रत्येक सांसद का नाम अपने रजिस्टर में दर्ज करेगा। यह पूरी प्रक्रिया खुली होगी। यहां, राजनीतिक दलों को सामूहिक रूप से मतदान करना होता है और प्रत्येक सदस्य को उस उम्मीदवार को वोट देना होता है जिसे उनकी पार्टी वोट दे रही है। अगर किसी संसदीय दल का कोई सदस्य अपनी पार्टी के निर्देशों के खिलाफ वोट करता है, तो उनका वोट नहीं गिना जाएगा।
वोट होने के बाद स्पीकर परिणाम की घोषणा करते हैं। प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने के लिए सदन में आधे से अधिक वोट यानी कुल 336 में से 169 वोटों की जरूरत होती है।
पीएम को चुनने के लिए स्पीकर की देखरेख में मत विभाजन द्वारा मतदान कराया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि दो उम्मीदवार हैं, तो स्पीकर कहेगा कि 'जो कोई भी उम्मीदवार 'ए' के लिए वोट करना चाहता है, वह लॉबी 'ए' में जा सकता है' और 'जो कोई भी उम्मीदवार 'बी' के लिए वोट करना चाहता है, वह लॉबी 'बी' में जा सकता है।' अगर तीन उम्मीदवार हैं तो एक लॉबी 'सी' भी हो सकती है।
लॉबी के प्रवेश द्वार पर नेशनल असेंबली सचिवालय स्टाफ का एक सदस्य होगा जो प्रत्येक सांसद का नाम अपने रजिस्टर में दर्ज करेगा। यह पूरी प्रक्रिया खुली होगी। यहां, राजनीतिक दलों को सामूहिक रूप से मतदान करना होता है और प्रत्येक सदस्य को उस उम्मीदवार को वोट देना होता है जिसे उनकी पार्टी वोट दे रही है। अगर किसी संसदीय दल का कोई सदस्य अपनी पार्टी के निर्देशों के खिलाफ वोट करता है, तो उनका वोट नहीं गिना जाएगा।
वोट होने के बाद स्पीकर परिणाम की घोषणा करते हैं। प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने के लिए सदन में आधे से अधिक वोट यानी कुल 336 में से 169 वोटों की जरूरत होती है।
पीएम पद की रेस में कौन?
पीएमएल-एन ने 72 साल के शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया है। वहीं, उमर अयूब खान जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पीटीआई के उम्मीदवार हैं।
पीएमएल-एन ने 72 साल के शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया है। वहीं, उमर अयूब खान जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पीटीआई के उम्मीदवार हैं।