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Argentina: अर्जेंटीना ने क्यों रद्द किया फॉकलैंड करार, क्या ब्रिटेन को माना जा रहा है कमजोर देश?

Sun, 05 Mar 2023 12:41 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, लंदन
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, लंदन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 05 Mar 2023 12:41 PM IST
सार

अर्जेंटीना स्थित ब्रिटिश राजदूत क्रिस्टी हेस ने 2016 के ‘ऐतिहासिक और महत्त्वपूर्ण समझौते’ को रद्द करने के अर्जेंटीना के फैसले पर निराशा जताई है। यह समझौता तब हुआ था, जब दक्षिणपंथी नेता मॉरिशियो मैक्री अर्जेंटीना के राष्ट्रपति थे। 

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Why did Argentina cancel the Falklands Agreement Britain is being considered a weak country Latest News
Rishi Sunak - फोटो : ANI

विस्तार

फॉकलैंड करार को एकतरफा तौर पर रद्द कर देने के अर्जेंटीना के फैसले से ब्रिटेन में बेचैनी का माहौल है। अर्जेंटीना के इस फैसले पर ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत नरम रही। इससे आलोचकों को यह कहने का मौका मिला है कि संकटग्रस्त ब्रिटेन को अब दुनिया में एक कमजोर देश के रूप में देखा जाने लगा है। ऐसी बातें सोशल मीडिया पर कही गई हैं।

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कुछ पर्यवेक्षकों के मुताबिक यूक्रेन की सैन्य मदद में ब्रिटेन ने खुद को फिलहाल इतना उलझा लिया है कि अर्जेंटीना को ऐसा कदम उठाने का यह सही मौका मालूम पड़ा। साथ ही ब्रिटेन महंगाई और गहराती सामाजिक समस्याओं में भी उलझा हुआ है।
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ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों ने अर्जेंटीना के इस फैसले को ‘निराशाजनक’ बताया है। फॉकलैंड को अर्जेंटीना में मालविनास द्वीप समूह के नाम से जाना जाता है। ब्रिटेन ने साल 1833 में इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था, जिन पर हमेशा से अर्जेंटीना का दावा रहा है। 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर जबरन कब्जा कर लिया था, जिसको लेकर दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ, जिसमें अर्जेंटीना हार गया। 74 दिन तक चली उस लड़ाई में अर्जेंटीना के 649 और ब्रिटेन के 255 सैनिक मारे गए थे।
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ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच फॉकलैंड/मालविनास द्वीपों को लेकर 2016 में एक समझौता हुआ था। अब अर्जेंटीना ने एकतरफा तौर पर उससे हटने का निर्णय लिया है। इस फैसले की ब्रिटेन को औपचारिक तौर पर जानकारी अर्जेंटीना के विदेश मंत्री  सांतियागो केफियेरो ने ब्रिटिश विदेश मंत्री जेम्स क्लेवर्ली को गुरुवार को नई दिल्ली में दी। ये दोनों मंत्री नई दिल्ली में हुई जी-20 देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए वहां गए थे।

ब्रिटिश विदेश मंत्री के साथ मुलाकात के बाद केफियेरो ने एक ट्विट में कहा कि अर्जेंटीना सरकार ने मालविनास द्वीप समूह की संप्रभुता के बारे में बातचीत फिर शुरू करने की पेशकश ब्रिटेन के सामने रखी है। ब्रिटेन से कहा गया है कि वह न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इस सिलसिले में अर्जेंटीना के प्रतिनिधि के साथ बैठक करे। उन्होंने कहा कि यह बातचीत संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र की उपनिवेश-समाप्ति समिति के निर्णय के मुताबिक होनी चाहिए।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटेन ने द्वीप समूह की संप्रभुता पर बातचीत की संभावना को ठुकरा दिया। क्लेवर्ली ने एक ट्विट में कहा कि फॉकलैंड द्वीपसमूह ब्रिटेन का हैं। वहां के बाशिंदों को अपने भविष्य के बारे में फैसला करने का अधिकार है और उन्होंने ब्रिटेन के स्वशासित प्रदेश के रूप में रहने का चयन किया है।

अर्जेंटीना स्थित ब्रिटिश राजदूत क्रिस्टी हेस ने 2016 के ‘ऐतिहासिक और महत्त्वपूर्ण समझौते’ को रद्द करने के अर्जेंटीना के फैसले पर निराशा जताई है। यह समझौता तब हुआ था, जब दक्षिणपंथी नेता मॉरिशियो मैक्री अर्जेंटीना के राष्ट्रपति थे। इस समझौते में प्रावधान था कि दोनों देश द्वीप समूह की संप्रभुता की अपनी राय-राय पर कायम रहते हुए भी ऊर्जा, जहाजरानी और मछली मारने जैसे कारोबार में सहयोग करेंगे।


पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस समझौते को लेकर अर्जेंटीनाई जनमत के एक हिस्से में शुरू से नाराजगी थी। इस हिस्से की राय रही है कि इस करार से सिर्फ को ब्रिटेन फायदा हो रहा था।

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