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भारत में मलेरिया के मामले और मौतों के मामले में सबसे ज्यादा कमी हुई दर्ज
Wed, 02 Dec 2020 03:53 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 02 Dec 2020 03:53 AM IST
सार
- डब्ल्यूएचओ की मलेरिया रिपोर्ट-2020 जारी, एकजुटता की अपील भी
- देश में पिछले दो साल में मामलों में 18 जबकि मौतों में 20 फीसदी की कमी
- दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रों में मलेरिया के दुनियाभर के तीन फीसदी मामले हैं
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत मलेरिया से लड़ाई में सबसे बेहतर स्थिति में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में वर्ष 2000 में मलेरिया के दो करोड़ मामले आए थे जो 2019 में घटकर 56 लाख रह गया है।
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डब्ल्यूएचओ ने सोमवार को मलेरिया रिपोर्ट 2020 को जारी किया। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2019 में दुनियाभर में 22.9 करोड़ मामले सामने आए। पिछले चार वर्षों में इसमें कोई खास बदलाव नहीं आया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में 4,11000 मौतें हुईं थी जो 2019 में घटकर 4,0,9000 हो गई। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में मलेरिया के मामलों में 73 और मौतों में 74 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
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भारत में मलेरिया के मामले में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज हुई है। ये आंकड़ा दो करोड़ से घटकर 60 लाख हो गया है। भारत में पिछले दो सालों में मलेरिया के मामलों में 18 जबकि मौतों में 20 फीसदी की कमी आंकी गई है। भारत में वर्ष 2000 से 2019 के बीच मलेरिया से होने वाली मौतों में भी कमी दर्ज की गई है। दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रों में मलेरिया के दुनियाभर के तीन फीसदी मामलों का भार है।
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भारत में अभी भी 88 फीसदी मामले
डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रों में मलेरिया से मौतों में 74 फीसदी की कमी आई है। वर्ष 2000 में मौतों का आंकड़ा 35 हजार था जो 2019 में घटकर 9,000 हो गया है। हालांकि इस क्षेत्र में सबसे अधिक भारत में मलेरिया के 88 फीसदी मामले और 86 फीसदी मौतें दर्ज हो रही हैं।
मलेरिया के खिलाफ एकजुट होना होगा
डब्ल्यूएचओ ने रिपोर्ट जारी करते हुए दुनिया के सभी देशों और स्वास्थ्य संस्थाओं से एकजुट होने की अपील की है ताकि मलेरिया को मात दी जा सके। संगठन का कहना है कि मलेरिया से बचाव और उसका इलाज दोनों संभव है इसके बाद भी हर साल हजारों लोगों की जान जा रही है। संयुक्त प्रयास से ही मलेरिया के मामले और मौतों को कम किया जा सकता है।
इन 11 देशों में सबसे ज्यादा केस
रिपोर्ट के अनुसार मलेरिया के सबसे ज्यादा मामले ग्यारह देशों बुर्किना फासो, कैमरून, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो, घाना, भारत, माली, मोजांबिक, नाइजर, नाइजीरिया, युगांडा और तंजानिया में सामने आ रहे हैं। इन देशों में दुनिया के 70 फीसदी मामले सामने आते हैं और 71 फीसदी मौतें होती हैं। इन देशों में अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
फंडिंग में कमी से खतरा बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार मलेरिया को नियंत्रित करने के लिए फंडिंग में भी कमी आई है। वर्ष 2019 में तीन बिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग हुई जबकि लक्ष्य 5.6 बिलियन डॉलर का था। विशेषज्ञों का कहना है कि फंडिंग में कमी का सीधा असर मलेरिया नियंत्रण से जुड़े जरूरी कार्यों पर पड़ेगा। जरूरी यंत्रों की खरीदारी न होने से स्थिति बिगड़ सकती है।