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बांग्लादेश : कौन हैं शेख मुजीब उर रहमान, जिनके स्मारक पर पीएम मोदी ने किया नमन, जानें सबकुछ

Sat, 27 Mar 2021 12:48 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 27 Mar 2021 12:48 PM IST
सार

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे शेख मुजीब उर रहमान स्मारक 
  • बांग्लादेश के महानायक शेख मुजीब उर रहमान को दी श्रद्धांजलि
  • शेख मुजीब उर रहमान को बांग्लादेश की जनता ने 'बंगबंधु' की दी उपाधि

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who is sheikh mujib ur rehman known as bangbandhu bangladesh father of the nation here you know all about him
शेख मुजीब उर रहमान (फाइल फोटो) - फोटो : social media

विस्तार

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बांग्लादेश दौरे का दूसरा दिन है और आज उन्होंने शेख मुजीब उर रहमान स्मारक पहुंचकर बांग्लादेश के महानायक को श्रद्धांजलि दी। शेख मुजीब उर रहमान को बांग्लादेश का संस्थापक कहा जाता है। इतना ही नहीं उन्हें इस देश का राष्ट्रपिता भी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर शेख मुजीब उर रहमान ना होते तो बांग्लादेश कभी आजाद ही नहीं होता। आइए जानते हैं कि बांग्लादेश को आजादी दिलाने में शेख मुजीब उर रहमान का क्या योगदान रहा और क्यों इन्हें बंगबंधु की उपाधि मिली...

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कौन थे शेख मुजीब उर रहमान ?
शेख मुजीब उर रहमान को बांग्लादेश का जनक माना जाता है। उन्होंने ही पाकिस्तान के खिलाफ आजादी की लड़ाई शुरू की थी और बांग्लादेश की स्थापना का रास्ता साफ किया था। शेख मुजीब उर रहमान का जन्म 17 मार्च 1920 को गोपालगंज के तुंगीपारा गांव में हुआ था।
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बांग्लादेश की आजादी के बाद शेख मुजीब उर रहमान देश के पहले राष्ट्रपति बने थे और फिर प्रधानमंत्री का पदभार संभाला। इन्हें शेख मुजीब के नाम से भी जाना जाता है। देश की जनता ने ही इन्हें बंगबंधु की उपाधि सौंप दी थी। ऐसा कहा जाता है कि उन्हें आदर के तौर पर बंगबंधु बुलाया जाता था। 
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शेख मुजीब उर रहमान के पिता का नाम शेख लुत्फुर और माता का नाम शेख सायरा खातुन मुजीब था। शेख मुजीब उर रहमान कुल छह भाई-बहन थे और ये तीसरे नंबर के थे। बांग्लादेश जब आजाद हुआ था तो तीन साल बाद सेना तख्तापलट के दौरान उनकी और उनके परिवार के बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। 

कैसे और क्यों हुई शेख मुजीब उर रहमान की हत्या?

1971 में पाकिस्तान से आजाद होने के बाद बांग्लादेश शेख मुजीब उर रहमान के नेतृत्व में तेजी से आगे बढ़ रहा था। भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ मुजीब उर रहमान की नजदीकी दोस्ती थी। उस समय शेख मुजीब उर रहमान ने नेशनलाइजेशन पर खासा जोर दिया। राष्ट्रपति होने के नाते उनका सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रीय राजनीति पर था लेकिन धीरे-धीरे उनके खिलाफ गुस्सा बढ़ने लगा। 

मुजीब पर भाई-भतीजावाद के आरोप लगने लगे। चार साल बीतते बीतते मुजीब उर रहमान के खिलाफ अलग-अलग धड़ों में गुस्सा पनपने लगा। इसमें सेना के कुछ अधिकारी भी शामिल थे। 



15 अगस्त 1975 को हुई हत्या
15 अगस्त 1975 को बांग्लादेश सेना के कुछ जूनियर अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर टैंक लेकर हमला कर दिया। इस हमले में शेख मुजीब उर रहमान समेत उनका परिवार और स्टाफ मारे गए। उनकी सिर्फ दो बेटियां शेख हसीना और शेख रेहाना की जान बच गई थी क्योंकि वो उस समय जर्मनी घूमने के लिए गई हुई थीं। 

मुजीब की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा का दौर चला। ये दौर करीब दो सालों तक चला। इसके बाद अपने पिता की खोई हुई विरासत को वापस लेने के लिए शेख हसीना ने लंबी राजनैतिक लड़ाई लड़ी और 1996 में वो बांग्लादेश की प्रधानमंत्री चुनी गईं।

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