E Cigarettes: डब्ल्यूएचओ का आग्रह- ई-सिगरेट पर लगाएं प्रतिबंध, 13-14 साल के बच्चे भी निकोटीन के हो रहे हैं आदी
डब्ल्यूएचओ महानिदेशक ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के पास राष्ट्रीय नियमों पर कोई अधिकार नहीं है। लेकिन, उम्मीद है कि सिफारिशों को सभी देश स्वेच्छा से अपनाएंगे, जैसा कि अब तक होता आया है।
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डब्ल्यूएचओ ने बृहस्पतिवार को दुनिया के तमाम देशों की सरकारों से आग्रह किया कि किसी भी तंबाकू उत्पाद की तरह वे ई-सिगरेट पर भी प्रतिबंध लगाएं। डब्ल्यूएचओ ने कहा, अलग फ्लेवर में पेश की जा रहीं ई-सिगरेट युवाओं को तंबाकू की लत का शिकार बना रही हैं। तंबाकू कंपनियां ई-सिगरेट को धूम्रपान के विकल्प के तौर पर पेश कर रही हैं। महानिदेशक टेड्रॉस गेेब्रेयसिस ने सख्त उपाय लागू करने का आग्रह करते हुए कहा कि 13-14 वर्ष के बच्चे ई-सिगरेट का उपयोग कर रहे हैं, जिससे वे निकोटिन के आदी हो रहे हैं। उन्होंने कानून में बदलावों का आह्वान करते हुए कहा, इसका सार्वजनिक इस्तेमाल रुकना चाहिए।
खतरनाक है सिगरेट कंपनियों का रवैया
डब्ल्यूएचओ महानिदेशक ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के पास राष्ट्रीय नियमों पर कोई अधिकार नहीं है। लेकिन, उम्मीद है कि सिफारिशों को सभी देश स्वेच्छा से अपनाएंगे, जैसा कि अब तक होता आया है। फिलिप मॉरिस इंटरनेशनल और ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको जैसे कुछ दिग्गज सिगरेट कंपनियां वेप्स के जरिये सिगरेट की खपत के लिए भविष्य की वैकल्पिक रणनीतियों पर काम कर रही हैं। यह खतरनाक है।